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चूर हुए सपने: गन प्वाइंट पर लेकर जबरन बॉर्डर क्रास कराया, अमेरिका पुलिस ने सात माह जेल में डाला

Thu, 31 Jul 2025 12:10 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली

सार

Meerut: दिलप्रीत सिंह ने फोन पर भारत से अमेरिका बॉर्डर तक पहुंचने और जेल काटने की दर्दभरी दास्तां आपके भी रोंगटे खड़े कर देगी। उन्होंने विदेश में नौकरी का सपना संजोया था लेकिन उन्हें मिली जेल की सलाखें।
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जेल - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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दिलप्रीत सिंह ने अमेरिका में अच्छी नौकरी करने का सपना संजोया था, लेकिन आरोपियों ने अपने जाल में ऐसा फंसाया कि लाखों की रकम तो हड़पी गई। साथ ही जिंदगी भी खतरे में पड़ गई। एजेंटों ने गन प्वाइंट पर रखकर जबरदस्ती अवैध तरीके से डंकी रास्ते से बॉर्डर क्रास कराया, फिर अमेरिका की पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया। सात माह तक अमेरिका की जेल काटने के बाद वह घर पहुंचा।

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दिलप्रीत सिंह ने फोन पर भारत से अमेरिका बॉर्डर तक पहुंचने और जेल काटने की दर्दभरी दास्तां बयान की। गुरबाज सिंह के इकलौते पुत्र दिलप्रीत सिंह ने फोन पर बताया कि 2021 में बीकॉम करने के बाद वह करनाल में निजी फाइनेंस कंपनी पर काम करता था। उसके रिश्तेदार परनीत सिंह ने उन्हें करनाल बैंक में नौकरी पर लगवाने के लिए बुलवाया।

वहां पर अर्शदीप व उसकी पत्नी जशनकौर भी मिलीं। उन्होंने उससे कहा कि यहां 15-20 हजार की नौकरी में क्या रखा है। अमेरिका में उनके आदमी हैं, वहां कैलीफोर्निया में दो से तीन लाख रुपये महीना की नौकरी दिला देंगे। इसमें उनका 35 लाख रुपये खर्चा आएगा। रिश्तेदार होने के कारण उसने उन पर भरोसा किया।
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आरोपियों ने कहा था कि हवाई जहाज से यूरोप के रास्ते दस दिन में अमेरिका भेज देंगे, लेकिन यूरोप के बजाए ब्राजील की तरफ से ले गए। ब्राजील तक हवाई जहाज से ले जाया गया, वहां उस पर दबाव बनाकर परिजनों से 15 लाख रुपये आरोपियों ने वसूल लिए। इसके बाद बस से ले जाकर पनामा से पहले रात में उन्हें जंगल में छोड़ दिया। चार-पांच दिन तक वे भूखे प्यासे पैदल चले और पानी और बिस्किट से काम चलाया।

इसके बाद बस से आगे लेकर चले तो रास्ते में माफियाओं ने उनका अपहरण कर लिया और परिजनों से तीन लाख रुपये वसूलकर उसे छोड़ा। गुवाटीमाला में पहुंचने पर 20 लाख रुपये मांगे गए। आरोपी उसके घर आकर परिजनों से 20 लाख रुपये ले गए। इसके बाद उन्हें मैक्सिको के स्थान पर दूसरे सोनाटा बॉर्डर से क्रास करने को कहा। उन्होंने मना किया तो उनके साथ मारपीट की गई और हथियार तानकर जान से मारने व जंगल में फेंकने की धमकी दी।

बॉर्डर क्रास करते ही अमेरिका पुलिस ने पकड़ लिया और टक्सन सिटी चौकी पर तीन-चार दिन रखा। इसके बाद टैक्सन की स्टेट जेल में डाल दिया। वहां की पुलिस ने बताया कि वे गलत तरीके से देश में घुसे हैं, इसमें उन्हें गोली भी मारी जा सकती थी। दो माह तक जेल में अकेले कमरे में रखा गया।

इसके बाद दस लोगों के साथ रखा। अमेरिका के न्यूजर्सी में रहने वाले रिश्तेदार ने उनकी जेल से रिहाई कराने में मदद की। 10 फरवरी 2025 को जेल से रिहा होकर वह हवाई जहाज से दिल्ली पहुंचा। दिलप्रीत का कहना है कि उसके साथ दो अन्य युवकों को भी भेजा गया था। जेल में पहले उनसे अलग रखा गया। बाद में कभी-कभी मिलने दिया जाता था।
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अमेरिका की जेल में समय पर नाश्ता व खाना मिला
दिलप्रीत सिंह ने बताया कि अमेरिका की जेल में सुबह को नाश्ता, दोपहर और शाम को समय से खाना मिलता था। उसे मानसिक तौर पर परेशान किया गया, लेकिन मारपीट जैसी कोई बात नहीं हुई। जिस कमरे में उसे तन्हाई में रखा गया, उसमें सिर्फ एक खिड़की थी। वह अकेला अपने और अपने परिजनों को याद कर परेशान रहा।
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