आरोपियों ने कहा था कि हवाई जहाज से यूरोप के रास्ते दस दिन में अमेरिका भेज देंगे, लेकिन यूरोप के बजाए ब्राजील की तरफ से ले गए। ब्राजील तक हवाई जहाज से ले जाया गया, वहां उस पर दबाव बनाकर परिजनों से 15 लाख रुपये आरोपियों ने वसूल लिए। इसके बाद बस से ले जाकर पनामा से पहले रात में उन्हें जंगल में छोड़ दिया। चार-पांच दिन तक वे भूखे प्यासे पैदल चले और पानी और बिस्किट से काम चलाया।
इसके बाद बस से आगे लेकर चले तो रास्ते में माफियाओं ने उनका अपहरण कर लिया और परिजनों से तीन लाख रुपये वसूलकर उसे छोड़ा। गुवाटीमाला में पहुंचने पर 20 लाख रुपये मांगे गए। आरोपी उसके घर आकर परिजनों से 20 लाख रुपये ले गए। इसके बाद उन्हें मैक्सिको के स्थान पर दूसरे सोनाटा बॉर्डर से क्रास करने को कहा। उन्होंने मना किया तो उनके साथ मारपीट की गई और हथियार तानकर जान से मारने व जंगल में फेंकने की धमकी दी।
बॉर्डर क्रास करते ही अमेरिका पुलिस ने पकड़ लिया और टक्सन सिटी चौकी पर तीन-चार दिन रखा। इसके बाद टैक्सन की स्टेट जेल में डाल दिया। वहां की पुलिस ने बताया कि वे गलत तरीके से देश में घुसे हैं, इसमें उन्हें गोली भी मारी जा सकती थी। दो माह तक जेल में अकेले कमरे में रखा गया।
इसके बाद दस लोगों के साथ रखा। अमेरिका के न्यूजर्सी में रहने वाले रिश्तेदार ने उनकी जेल से रिहाई कराने में मदद की। 10 फरवरी 2025 को जेल से रिहा होकर वह हवाई जहाज से दिल्ली पहुंचा। दिलप्रीत का कहना है कि उसके साथ दो अन्य युवकों को भी भेजा गया था। जेल में पहले उनसे अलग रखा गया। बाद में कभी-कभी मिलने दिया जाता था।
अमेरिका की जेल में समय पर नाश्ता व खाना मिला
दिलप्रीत सिंह ने बताया कि अमेरिका की जेल में सुबह को नाश्ता, दोपहर और शाम को समय से खाना मिलता था। उसे मानसिक तौर पर परेशान किया गया, लेकिन मारपीट जैसी कोई बात नहीं हुई। जिस कमरे में उसे तन्हाई में रखा गया, उसमें सिर्फ एक खिड़की थी। वह अकेला अपने और अपने परिजनों को याद कर परेशान रहा।