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Shamli News: हरियाणा सरकार ने यूपी के किसानों को बारीक किस्म का धान बेचने की दी अनुमति

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बिडौली। दो सप्ताह से जारी गतिरोध के बाद आखिरकार हरियाणा सरकार ने रविवार सुबह यूपी के छोटे किसानों को राहत देते हुए हरियाणा की मंडियों में बारीक किस्म के धान को बेचने की अनुमति दे दी। सरकार के इस फैसले से किसानों को राहत मिली है।
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हरियाणा सरकार ने यूपी से आने वाले धान पर रोक लगा रखी थी। इसके कारण हरियाणा-यूपी बॉर्डर पर ट्रकों और ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग जाती थीं। इस जाम से राहगीरों को जहां परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं किसानों की फसल मंडियों तक न पहुंच पाने के कारण वे असमंजस की स्थिति में थे।
रास्ता बंद होने से मजबूर होकर यूपी के किसानों ने अपनी फसल सहारनपुर जिले की गंगोह मंडी में औने-पौने दामों में बेचनी शुरू कर दी थी। उधर, कम दाम और हरियाणा के कमीशन आढ़तियों से लिए गए एडवांस भुगतान के कारण किसान दोहरी मार झेल रहे थे। एक ओर उन्हें अपनी उपज सस्ते में बेचनी पड़ी। वहीं दूसरी ओर एडवांस रकम पर ब्याज और आढ़त भी चुकानी पड़ी।
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हालांकि अब हरियाणा सरकार ने कुछ राहत देते हुए यूपी के छोटे किसानों को बारीक किस्म के धान की बिक्री की अनुमति दी है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर बिकने वाले धान व व्यापारियों द्वारा खरीदे गए धान की एंट्री अब भी प्रतिबंधित है। इसके चलते मेरठ-करनाल हाईवे और बिडाैली बॉर्डर पर अब भी लंबा जाम बना हुआ है। कुल मिलाकर हरियाणा सरकार के इस निर्णय से सीमावर्ती इलाकों के किसानों को कुछ राहत तो मिली है, लेकिन पूर्ण समाधान अभी बाकी है। किसानों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द सभी किस्मों के धान की बिक्री से रोक पूरी तरह हटाए ताकि उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
-निगरानी के निर्देश
हरियाणा प्रशासन ने बॉर्डर चौकियों को निर्देश दिए हैं कि यूपी से आने वाले प्रत्येक किसान का नाम, पता और जिस कमीशन आढ़ती के पास वह अपनी फसल बेचने जा रहा है, उसका मंडी नाम और दुकान नंबर रजिस्टर में दर्ज किया जाए। ताकि प्रशासनिक अधिकारी किसी भी समय इस प्रक्रिया की जांच कर सकें।

मंगलौर पुलिस चौकी इंचार्ज मनजीत कुमार ने बताया कि उन्हें एसडीएम करनाल की ओर से मौखिक आदेश मिले हैं कि यूपी से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धान लाने वाले किसानों को हरियाणा में प्रवेश की अनुमति दी जाए, लेकिन उनकी पूरी जानकारी चौकी रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
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