हाथ धुलवाया, गोले में खड़ा कराया, फिर भी नंबर नहीं आया
शामली। रेड जोन में होने के बावजूद अभिभावकों की समस्या को देख प्रशासन ने सोमवार को तीन घंटे स्टेशनरी की दुकानें खोलने की छूट दी। हालत ये हुई कि दुकानें खुलने से पहले ही अभिभावक दुकानों के बाहर जाकर बैठ गए। लंबी कतार लग गई। दुकानों पर प्राइवेट सिक्योरिटी का भी इंतजाम किया गया था, साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया। निर्धारित दूरी पर बनाए गए गोलों के अंदर ही अभिभावकों को खड़ा किया। हालांकि समय कम होने की वजह से बहुत से अभिभावकों को खाली हाथ भी लौटना पड़ा। अमर उजाला टीम ने शहर का दौरा कर जायजा लिया। पेश है रिपोर्ट...
एक एक कर आया नंबर, सैनिटाइज भी किया
कैराना रोड पर अशर्फी लाल जगदीश प्रसाद वालों ने काफी बड़े हाल में व्यवस्था की थी। दुकान के नीचे बड़ा खाली एरिया था। करीब 20 अभिभावक रिंग में खड़े अपने नंबर का इंतजार करते नजर आए। कुछ आसपास दूरी पर बैठे थे। दो प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड व्यवस्था बनाने में लगे थे। अभिभावक के अंदर जाने से पहले सैनिटाइजर से हाथ साफ कराए जा रहे थे। सभी कक्षाओं के सैट पहले से तैयार थे। अभिभावक स्कूल और क्लास बताते ही बैग में पैक पूरा सैट दे दिया जाता। डिजिटल भुगतान भी लिया जा रहा था।
रात को ही बना दिए थे गोले
सोमवार से दुकानें खुलनी थीं लिहाजा पुस्तक विक्रेताओं ने एक दिन पहले ही लॉकडाउन में छूट के वक्त जाकर अपनी दुकानों के बाहर निर्धारित दूरी के गोले बना लिए थे। इनमें ही अभिभावक खड़े किए गए थे। स्कूलों ने अभिभावकों को मेसेज भेजकर बता दिया था कि उनके स्कूल का कोर्स किसके यहां मिलेगा। अभिभावक उसी दुकान पर गए और वहां से अपने बच्चे की क्लास के अनुसार कोर्स लेकर आ गए।