जागरूकता से ही रोका जा सकता है भूजल का स्तर
शामली। जल है तो जीवन है। जल के बिना जीवन संभव नहीं है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण जनपद में जलदोहन और उसकी बर्बादी होने से भूजल स्तर लगातार घटता जा रहा है। वर्तमान में जनपद में जलस्तर 80 फीट के करीब पहुंच चुका है। सबमर्सिबल से सबसे ज्यादा जल की बर्बादी हो रही है। लगातार हो रहे जलदोहन और बर्बादी रोकने से ही गिरता जलस्तर रोका जा सकता है।
जनपद में करीब चार साल पहले तक भूजल स्तर करीब 50 फीट के आसपास था, लेकिन हर साल लगातार जल स्तर गिरता जा रहा है। इसके लिए शहर से लेकर गांव देहात तक सबमर्सिबल से पानी की बर्बादी और लगातार जलदोहन ही जिम्मेदार है। भूजल स्तर रोकने के लिए लोगों को पानी को बर्बाद होने से रोकना होगा और जितनी जरूरत है, उतना ही पानी का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।
शहर में मानक से ज्यादा पानी की सप्लाई
शामली शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख है। नगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक शहर मे प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी दिया जा रहा है। पालिका अधिकारियों का कहना है कि मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 165 लीटर पानी की जरूरत होती है। पालिका की तरफ से करीब 266 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। शहर में 39 नलकूप हैं, जिनमें दो ओवरहैड टैंक पर जेनरेटर की व्यवस्था है। बाकी 37 नलकूप बिजली के भरोसे ही चलती है। शहर में रात 11 बजे से तीन बजे तक पानी की सप्लाई बंद रहती है। अगर बिजली में खराबी आ जाए तो पानी का संकट बन सकता है। पालिका के जलकल विभाग के जेई विशाल गुप्ता का कहना है कि शहर में पानी की कोई कमी नहीं है।
कोट
शहर में पेयजलापूर्ति मानक से ज्यादा हो रही है। लोगों को जल की बर्बादी रोकने के प्रयास करने चाहिए। जरूरत के अनुसार पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। लगातार भूजल दोहन से जल स्तर घट रहा है। इसके चलते वर्तमान में जलस्तर 80 फीट के आसपास पहुंच चुका है।
- सुरेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका शामली।