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‘किसानों के सामने सरकार को झुकना पड़ा’

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झिंझाना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि बिलों के वापसी की घोषणा से किसानों में खुशी तो देखने को मिल रही है, मगर अभी भी उन्हें संदेह है। किसान प्रधानमंत्री के इस आश्वासन और फैसले के अलावा एमएसपी पर संसद की मोहर चाहते हैं। तब तक धरने को लगातार समर्थन देने की बात कर रहे हैं। इस पर कुछ किसानों ने अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं भी व्यक्त की है ।
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भारतीय किसान यूनियन के ऊन ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद खोडसमा का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा किसान बिलों की वापसी की घोषणा से किसानों में खुशी की लहर है। गांव खोड़समा में प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत करते हुए ढोल बजाकर एक दूसरे किसानों को मिठाई खिलाई गई और गांव में जुलूस निकाला। साथ ही सरकार एमएसपी और बिलों की वापसी को लिखित रूप से संसद में पास नहीं करती जब तक किसानों का धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
राष्ट्रीय लोकदल के जिला महासचिव सनोज चौधरी टोड़ा का कहना है कि आखिरकार सरकार को किसानों के सामने झुकना पड़ा, मगर यह फैसला मोदी सरकार ने हिटलर शाही करने के बाद और अब चुनावी लाभ लेने के लिए सुनाया है। गांव दरगाह पुर निवासी किसान नेता चौधरी देशपाल सिंह का कहना है कि एमएसपी और तीनों बिलों की वापसी पर जब तक संसद की मुहर नहीं लगती किसान अपना धरना जारी रखें। क्योंकि एक वर्ष तक चले इस धरने प्रदर्शन में लगभग 700 किसानों ने अपना बलिदान दिया है। किसानों को उनका हक मिले बिना उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। मगर फिलहाल प्रधानमंत्री की कृषि बिलों की वापसी की घोषणा ने किसानों को राहत जरूर प्रदान की है ।
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