जिले के एक प्रॉपर्टी डीलर की 50 करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद तहसीलदार न्यायिक कोर्ट में चला गया है। इस मामले पर 19 दिसंबर को सुनवाई होगी। प्रॉपर्टी डीलर की हत्या हो चुकी है। उसने अपनी सारी संपत्ति की वसीयत उत्तर प्रदेश सरकार के नाम कर दी थी। पिता की हत्या के आरोप में जेल जा चुके उसके बेटे ने इस वसीयत पर आपत्ति दर्ज कराई है।
शासकीय अधिवक्ता सोमपाल चौहान ने बताया कि शामली क्षेत्र के गांव खेेड़ी करमू निवासी जितेंद्र सिंह (60) गाजियाबाद के राजनगर में रहकर प्रॉपर्टी डीलर का कार्य करता था। राजनगर में ही इसी साल 26 जून को उनकी हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में उसका बेटा और पत्नी जेल गए थे। फिलहाल दोनों आरोपी जमानत पर हैं।
जितेंद्र की हत्या के बाद 27 जुलाई को उसके द्वारा 19 जनवरी 2016 को तैयार की गई उत्तर प्रदेश सरकार के नाम वसीयत शामली तहसीलदार राकेश त्यागी की कोर्ट में पेश की गई। जिसमें प्रॉपर्टी डीलर की संपत्ति को उत्तर प्रदेश सरकार के पक्ष में दर्ज कराने की अपील की गई।
जितेंद्र के पुत्र अमित ने 29 अगस्त को इस पर आपत्ति दर्ज कराई और वसीयत को विधि के अनुसार सही नहीं मानते हुए खंडित होने योग्य बताया। उन्होंने बताया कि जितेंद्र सिंह का राजनगर में तीन सौ वर्ग मीटर मकान, नोएडा में प्लाट, गाजियाबाद में प्लाट और दुकानें, खेड़ी करमू व मुंडेट के जंगल में कृषि भूमि और बाग अंकित है। वसीयत के अनुसार 50 करोड़ रुपये की संपत्ति का आंकलन हुआ है।
तहसीलदार न्यायिक राकेश कुमार त्यागी के न्यायालय में वाद विचाराधीन है। जिसमें प्रतिवादी की ओर से वसीयत के दो गवाह रोबिन सिंह और राजू चौधरी के बयान दर्ज हो चुके हैं। शेष गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए 19 दिसंबर को तलब किया गया है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि प्रॉपर्टी डीलर ने वसीयत में बैंक एकाऊंट को छोड़ दिया था।