शामली। जिला अस्पताल में चार दिन पहले नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई है, लेकिन ब्लड बैंक न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट बैंक से ब्लड खरीदना होगा। ऐसी स्थिति में नि:शुल्क डायलिसिस होते हुए भी मरीज को महंगी पड़ेगी। अभी तक आठ मरीजों की डायलिसिस की गई है, जिनमें एक मरीज में हीमोग्लोबिन कम होने के कारण ब्लड की जरूरत पड़ चुकी है।
शामली को जिला बने हुए दस साल हो गए, लेकिन अभी तक ब्लड बैंक की सुविधा नहीं मिल पाई है। जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत एसकेज संजीवनी कंपनी द्वारा डायलिसिस यूनिट स्थापित की गई है। मरीजों की डायलिसिस नि:शुल्क है। मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। शासन स्तर से ही कंपनी को भुगतान किया जाएगा। इस यूनिट में फिलहाल दो मशीनें लगाई गई हैं। यूनिट में दस मशीनें लगाई जाना प्रस्तावित है। चार दिन पहले सोमवार को डायलिसिस यूनिट शुरू कर दी गई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि जिन मरीजों का हीमोग्लोबिन सामान्य से कम होता है, उनकी डायलिसिस के लिए ब्लड की जरूरत होती है। लेकिन जिले में ब्लड बैंक न होने से मरीज को प्राइवेट बैंक से ही ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि चार दिन में अब तक आठ मरीजों की डायलिसिस की जा चुकी है। इनमें से एक मरीज का हीमोग्लोबिन कम होने के कारण रक्त की जरूरत पड़ी है। ऐसी स्थिति में डायलिसिस की सुविधा नि:शुल्क होते हुए भी मरीज को महंगी पड़ेगी।
सीएचसी पर केवल गर्भवती महिलाओं के लिए ब्लड की सुविधा
सीएचसी शामली पर रक्त संग्रह केंद्र है। इस केंद्र से सरकारी अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को ब्लड उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। रक्त संग्रह केंद्र पर तैनात एलटी अभिषेक ने बताया कि 16 नवंबर को डायलिसिस वार्ड में भर्ती एक मरीज को जिला अस्पताल के सीएमएस की एडवाइज पर ब्लड उपलब्ध कराया गया है। हालांकि उनके यहां सरकारी अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए ही नि:शुल्क ब्लड देने की व्यवस्था है।
शासन में भेजा गया ब्लड बैंक का प्रस्ताव
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि ब्लड बैंक के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके बाद भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है। अब फिर से डीएम के माध्यम से शासन को ब्लड बैंक के लिए पत्र भेजे जाने की तैयारी की जा रही है ताकि जल्द से जल्द ब्लड बैंक की सुविधा उपलब्ध हो सके।