शामली। जिले में हर साल बरसात के मौसम के साथ सांपों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में अब तक चार प्रजातियों के सांप चिह्नित किए जा चुके हैं। करैत, कोबरा, रेड सेंड बोआ और पानी वाला सांप। इनमें से कोबरा और करैत सबसे ज्यादा जहरीले और जानलेवा माने जाते हैं और जिले में यही सबसे अधिक पाए जा रहे हैं।
बनत और थानाभवन क्षेत्र ऐसे इलाके हैं जहां सबसे अधिक सांप देखे गए हैं। वन विभाग की टीम ने जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 15 सांपों को रेस्क्यू किया, जिनमें 6 करैत, 6 कोबरा, 1 रेड सेंड बोआ और 2 पानी वाले सांप शामिल थे।
वर्ष 2024 : 20 सांप : 8 करैत, 7 कोबरा, 3 रेड सेंड बोआ, 2 पानी वाले।
वर्ष 2023 : 15 सांप : 7 करैत, 6 कोबरा, 2 रेड सेंड बोआ रेस्क्यू किए गए।
बारिश में क्यों बढ़ता है खतरा?
क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार के मुताबिक बारिश के मौसम में सांपों के प्राकृतिक बिलों में पानी भर जाने के कारण वे शरण की तलाश में घरों, स्कूलों और गोदामों की तरफ आ जाते हैं। यही वजह है कि बरसात के मौसम में सांपों की आवाजाही और सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि अब लोगों का नजरिया बदला है। पहले जहां सांप दिखने पर लोग मार देते थे, वहीं अब वे विभाग को सूचना देकर सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कराते हैं।
यह भी जानें...
करैत : भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक। यह अधिकतर रात में सक्रिय रहता है।
कोबरा: जाने-माने खतरनाक विषैले सांपों में से एक। पहचानना आसान लेकिन बचना जरूरी।
रेड सेंड बोआ : गैर विषैला, दोमुंहा कहा जाता है क्योंकि इसकी पूंछ सिर जैसी दिखती है। इंसानों के लिए नुकसानदेह नहीं।
पानी वाला सांप : तालाब, नदी या झीलों के आसपास मिलता है। आमतौर पर जहरीला नहीं होता।
क्या करें अगर सांप दिखे?
डीएफओ जयदेव ने बताया कि आम लोग यह पहचान नहीं सकते कि सांप जहरीला है या नहीं, इसलिए छेड़ें नहीं, पकड़ने की कोशिश न करें।
इमरजेंसी नंबर – 753500732 पर सूचना दें। टीम मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित स्थान पर छोड़ेगी।
- सर्पदंश के अब तक 38 मामले
सीएमएस डॉ. किशोर आहूजा के अनुसार, इस साल अब तक शामली जिले में 38 सर्पदंश के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। 13 मरीज जिला अस्पताल में, जबकि 25 मरीज विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचे हैं। डॉ. आहूजा ने बताया कि सभी अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है। सांप काटने पर पहले 30 मिनट बेहद अहम होते हैं। जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचा जाए, उतना ही ज्यादा जीवन बचाने की संभावना होती है।