संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। इस बार यमुना में आई बाढ़ ने न केवल किसानों की फसलें उजाड़ दीं, बल्कि उनकी जमीन की पहचान पर भी संकट खड़ा कर दिया है। प्रशासन के सर्वे के अनुसार, कैराना और चौसाना क्षेत्र की करीब 730 बीघा भूमि हरियाणा की सीमा में खिसक गई। ऐसे में आशंका है कि एक बार फिर यूपी-हरियाणा सीमा विवाद खड़ा हो सकता है। यमुना का जलस्तर घटने के बाद सीमांकन का कार्य शुरू किया जाएगा।
करीब 15 दिन पहले हथिनी कुंड बैराज से 3.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी 232 मीटर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से ऊपर था। बाढ़ के कारण मोहम्मदपुर राई खादर क्षेत्र की 70 बीघा जमीन यमुना में समा गई। गांव के पूर्व प्रधान यूसुफ की 7 बीघा, नूर मोहम्मद की 6 बीघा, शहजाद की 4 बीघा, नफीस की 4 बीघा और नूरा की 5 बीघा भूमि पर खड़ी फसल पूरी तरह बह गई। तहसीलदार अर्जुन सिंह ने बताया कि मौके की जांच में खसरा नंबर तक गायब मिले। भड़ी मुस्तफाबाद और कुंडा में 150 बीघा जमीन प्रभावित : इन गांवों के नाजिम राणा, आरिफ, रमजानी, अलीहसन, खलील, नूरहसन और पूर्व प्रधान खलील सहित कई किसानों की करीब 150 बीघा जमीन या तो पानी में बह गई या हरियाणा सीमा में खिसक गई।
नाई नगला में 300 बीघा खेत सीमा पार : महिपाल, शुभम, सतपाल, ओमकार, स्वराज, बेघराज, योगेंद्र, धीरज कादियान सहित अनेक किसानों की खरीदी-बिक्री वाली जमीन प्रभावित हुई। 300 बीघा से अधिक खेत हरियाणा में चली गई। मंगलौरा में 200 बीघा से अधिक खेत नदी पार : ब्रजपाल, चंद्रपाल, शीशपाल, ओमकार, सीताराम, सोमपाल, जयदेव, सहदेव, रविंद्र और नरेंद्र सहित किसानों की 200 बीघा से अधिक भूमि नदी के उस पार चली गई।