पहले गणतंत्र दिवस पर चौपाल में गुड़ बांटकर मनाई थी खुशी
शामली। देश में पहले गणतंत्र दिवस पर देश में हर तरफ उल्लास और उत्साह का माहौल था। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने की खुशी हर तरफ दिखाई दे रही थी। गांव देहात में भी पहले गणतंत्र दिवस पर जश्न और खुशी का माहौल था। बुजुर्गों ने कहा कि भारत के इतिहास में यह दिन बहुत ही गौरवशाली दिन रहा है।
झिंझाना क्षेत्र के गांव गागौर के मूल निवासी 96 वर्षीय बिशंबर शर्मा शामली में हनुमान रोड पर अपने बेटे सत्यवीर शर्मा के साथ रह रहे हैं। पहले गणतंत्र दिवस के बारे में उनसे बात की गई तो उन्होंने उस दिन को याद करते हुए कहा कि वह दिन भारत के इतिहास में बहुत ही गौरवशाली दिन था। उस दिन गांव के चौकीदार ने ग्रामीणों को बताया था कि अब अंग्रेजों का संविधान को खत्म कर भारतीय संविधान लागू हो गया है, तो उन्हें ऐसा लगा कि जैसे किसी ने कुएं से निकालकर बाहर खुले मैदान में बैठा दिया हो। इस खुशी में ग्रामीणों ने गांव की चौपाल में इकट्ठा होकर खुशी में गुड़, चना बताशे बांटे थे और ढोल बजाए गए थे। महिलाओं ने भी अपने आंगन में इकट्ठी होकर मंगल गीत गाए थे। ऐसा माहौल था जैसे शादी का माहौल हो। गांव में चारों तरफ देशभक्ति और भारत मां के जय के नारे लग रहे थे। दोपहर में गांव में थानेदार पहुंचे थे और लोगों को इकट्ठा कर संविधान के बारे में जानकारी दी थी। शहर की चौधरी चरण सिंह कालोनी में परिवार के साथ रह रहे गांव कुरमाली निवासी 87 वर्षीय साहब सिंह ने बताया कि जब गांव में पता चला कि अपने देश का संविधान लागू हो गया है, तो गांव में अलग ही तरह की खुशी थी। ऐसा लगा की जैसे किसी बंद कमरे से निकलकर खुली हवा में सांस ले रहे हो। गांव में देशप्रेम का जोश और जज्बा दिखाई दिया। खुशी में युवा वर्ग के लोग भारत माता की जय के नारे लगाते हुए और हाथ में तिरंगा लेकर घूमे थे। ग्रामीणों ने उस दिन एक दूसरे से मिलकर भारत के संविधान लागू होने की खुशी बांटी थी।