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बिना पोषण बीमारी से लड़ रहे जंग

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शामली। जिले में क्षय रोगियों को अप्रैल और मई माह का निक्षय पोषण के तहत पोषण के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। पोषण भत्ता न मिलने के कारण क्षय रोगियों को बीमारी से जूझना पड़ रहा है। जिले में इस समय लगभग 1645 सक्रिय रोगियों का उपचार चल रहा है। अधिकारियों ने इसकी वजह शासन से बजट न मिलना बताया गया है।
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सरकार द्वारा नि:क्षय पोषण योजना के तहत क्षय रोगी को पौष्टिक खाद्य पदार्थों के लिए 500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता उनके खाते में डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। यह धनराशि जब तक मरीज का उपचार चलता है, तब तक उपलब्ध कराई जाती है। जिले में 2022 में तीन हजार क्षय रोगियों की खोज करने का लक्ष्य दिया गया है। जिले में लगातार क्षय रोगी मिल रहे हैं। अब तक जिले में 1162 नए मरीज मिल चुके हैं, जो लक्ष्य का 39 प्रतिशत है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में इस समय लगभग 1645 सक्रिय क्षय रोगी है, जिनका नि:शुल्क उपचार चल रहा है, लेकिन इन रोगियों के सामने समस्या ये है कि अप्रैल व मई माह में नि:क्षय पोषण योजना के तहत सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता राशि 500 रुपये प्रति माह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस वजह से क्षय रोगी बिना पोषण के ही बीमारी की जंग लड़ रहे हैं।
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अधिकारी इसकी वजह शासन से बजट जारी न होना बता रहे हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीसी) राहुल कुमार ने बताया कि शासन से बजट न मिलने की वजह से अप्रैल व मई माह में क्षय रोगियों को नि:क्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। दो दिन पहले हुई मीटिंग में बताया गया है कि शासन स्तर से बजट जारी किया जा चुका है, जल्द ही क्षय रोगियों के बैंक खाते में आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध हो जाएगी।
चार केंद्रों पर क्षय रोग जांच की सुविधा
डीपीसी राहुल कुमार ने बताया कि जिले में शामली, कैराना, कांधला और थानाभवन सीएचसी पर ट्रूनेट मशीन से क्षय रोग की जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा थानाभवन क्षेत्र के गांव महावतपुर में सीबी नेट मशीन से भी जांच की जा रही है। क्षय रोगी को ड्रॉप सेंटर के अलावा निकटतम ट्रीटमेंट सपोर्टर के यहां नि:शुल्क दवा की सुविधा उपलब्ध है ताकि रोगी का नियमित रूप से उपचार चलता रहे।
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