शामली। अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते कच्चे माल के दामों में आई तेज बढ़ोतरी का असर अब जिले के उद्योगों और बाजार पर दिखने लगा है। उत्पादन लागत बढ़ने से जहां उद्यमी आर्थिक दबाव में हैं, वहीं उत्पादों के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
जिले में संचालित 250 से अधिक छोटी-बड़ी फैक्टरियों में हैंडलूम, घरेलू साज-सज्जा, पैकेजिंग, प्लास्टिक उत्पाद, रिमधुरे, अगरबत्ती और धूपबत्ती जैसे सामान तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल बाहर से मंगाया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते सप्लाई प्रभावित हो रही है और दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
प्लास्टिक दाना, जो पहले करीब 85 रुपये प्रति किलो मिलता था, अब 160 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। लोहे की शीट के दाम 47 रुपये से बढ़कर 61 रुपये प्रति किलो हो गए हैं, जबकि सरिये में भी करीब आठ रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कागज के दाम 30 रुपये से बढ़कर 35 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। वहीं पॉलीथिन के दाम 120 रुपये से बढ़कर 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादों की लागत भी बढ़ गई है, जिसके चलते उद्यमियों को अपने उत्पाद महंगे करने पड़े हैं।
बोले उद्यमी
उद्यमी अनुज गर्ग ने बताया कि प्लास्टिक दाने के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और पहले से लिए गए कई ऑर्डर निरस्त हो गए हैं। नए ऑर्डर भी कम मिल रहे हैं, जिससे उद्योगों पर संकट गहरा रहा है।
उद्यमी अंकित गोयल का कहना है कि पैकेजिंग सामग्री महंगी होने से उत्पादों की कीमत बढ़ गई है। कई कंपनियों ने महंगे उत्पाद लेने से इनकार कर दिया है। उनका मानना है कि उद्योगों को दोबारा पटरी पर आने में अभी समय लगेगा।