शामली। जिले में साइबर ठग द्वारा नौकरीपेशा को फोन कर बेटे के दुष्कर्म के मामले में फंसने की बात कहते हुए डेढ़ लाख की ठगी कर ली गई। वहीं चीफ फार्मासिस्ट और अन्य सूझबूझ से ठगी से बच गए। साइबर सेल लोगों को डिजिटल अरेस्ट से बचने की अपील कर रहा है।
करोड़ी गांव के रहने वाले किसान शेखर ने साइबर सेल में शिकायत करते हुए बताया कि उसके पास बीती 25 मई को अनजान नंबर से व्हाट्सए वीडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने कहा कि वह पुलिस वाला है। आपका बेटा दुष्कर्म के मामले में फंस गया है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है, जेल भेज रहे हैं, रोते हुए लड़के से भी बात कराई गई। बचाना है तो डेढ़ लाख रुपये दो, वरना तुम भी फंस जाओंगे। साइबर ठग के बहकावे में आकर किसान ने बताए गए खाते में डेढ़ लाख रुपये भेज दिए। अब पीड़ित ने अज्ञात के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज कराया है।
जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट ताहिर बेग के पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल की गई। कहा गया कि तुम्हारा लड़का आपराधिक मामले में फंस गया है, पुलिस विभाग से बोल रहे हैं, यदि फोन काटा तो कार्रवाई हो जाएगी। हालांकि ताहिर ठगों के बहकावे में नहीं आए और फोन बीच में ही काट दिया। इनके अलावा शहर के रहने वाले सतबीर शर्मा के बेटे के भी मामले में फंसने का आरोप लगाते हुए ठगों ने ठगी का प्रयास किया मगर वह ठगों के झांसे में नहीं आए।
साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर संजीव भटनागर के अनुसार, इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग शिकायत से पीछे हट रहे हैं। लोगों को इस तरह की कॉल पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है।
24 घंटे में शिकायत दर्ज कर देनी चाहिए
साइबर एक्सपर्ट इंस्पेक्टर संजीव भटनागर के अनुसार, यदि किसी के साथ ठगी हुई है तो पुलिस या फिर साइबर थाने में शिकायत करें, 24 घंटे के अंदर यदि शिकायत की जाती है तो जिस खाते में रुपये डाले गए हैं, उसे फ्रीज करा दिया जाता है, रुपये वापस आने की संभावना रहती है।
जागररूकता ही बेहतर बचाव
एसपी अभिषेक ने बताया कि साइबर ठग तरह-तरह से लोगों को भ्रमित कर उनकी कमाई लूट रहे हैं। इसलिए जागरुकता ही सबसे बेहतर बचाव है। दूसरों को भी ऐसी स्थिति में हिम्मत से काम लेना चाहिए।
यहां दर्ज कराएं शिकायत...
जांच एजेंसी या पुलिस आपको फोन करके धमकी नहीं देती है। जांच एजेंसी या पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करती है अगर आपको भी डराने-धमकाने के लिए इस तरह के फोन आते हैं तो आप तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें या फिर 1930 नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। साइबर थाने में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
आखिर कौन-सी बला है डिजिटल अरेस्ट?
साइबर एक्सपर्ट के अनुसार डिजिटल अरेस्ट ब्लैकमेल करने का एक एडवांस तरीका है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम के शिकार वही लोग होते हैं जो अधिक पढ़े लिखे और अधिक होशियार होते हैं। डिजिटल अरेस्ट का सीधा मतलब ऐसा है कि कोई आपको ऑनलाइन धमकी देकर वीडियो कॉल के जरिए आप पर नजर रख रहा है। डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठग नकली पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते हैं और अपना शिकार बनाते हैं।