खुद न बनें डॉक्टर, वरना बिगड़ जाएगी सेहत
प्रदीप वर्मा
कैराना। थोड़ा सा नजला जुकाम होते ही लोग डॉक्टर के बजाय मेडिकल स्टोर पहुंचते हैं। मर्ज बताया और स्टोर वाला एंटीबायोटिक हाथ में थमा देता है, लेकिन ये ठीक नहीं है। चिकित्सकों का कहना है कि बिना वजह अंधाधुंध एंटीबायोटिक दवाइयों का इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। उपचार के दौरान इस तरह के मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिनकी एंटीबायोटिक दवाई खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है।
आजकल अधिकतर लोग यही करते हैं। सिर दर्द, कमर दर्द नजला जुकाम या बुखार होते ही वह सीधे मेडिकल स्टोर पर जाते हैं। बीमारी बताकर स्टोर वाले से ही दवा देने को कहते हैं। स्टोर पर बैठा व्यक्ति उन्हें मर्ज के हिसाब से दवाई दे देता है। बहुत से लोगों को जल्द आराम भी मिल जाता है और धीरे धीरे उनकी ये आदत बन जाती है। वह बीमारी पर डॉक्टर की बजाय सीधे स्टोर पर ही जाते हैं। कुछ लोग तो स्टोर से मिलने वाली दवाओं के नाम याद कर खुद के ही डॉक्टर बन जाते हैं, लेकिन ये सब उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। कैराना सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों से पूछताछ के बाद इस बात का पता चला है। लंबे समय से अधिक एंटीबायोटिक दवा प्रयोग करने से उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है साथ ही बीमारी के वायरस और बेक्टिरिया भी एंटीबायोटिक का घर बना लेते हैं। जिस पर बाद में कई तरह की एंटीबायोटिक दवा भी असर नहीं करतीं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर संजय भटनागर ने बताया कि बिना वजह अप्रशिक्षित व्यक्ति, मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा लेने के कारण शरीर में बीमारी के वायरस और बेक्टिरिया घर बना लेते हैं। इस कारण मरीज उस दवाई से ठीक नहीं हो पाता। ऐसे में मरीज के यूरिन या ब्लड का कल्चर एंड सेंसटिव टेस्ट कराना होता है। जिसमें ये पता चला है कि मरीज पर कौन वायरस या बेक्टिरिया इंफेक्टिड कर रहा है तथा उस जीवाणु के ऊपर कौन सी एंटीबायोटिक दवा कारगर होगी। बेहतर होगा कि लोग खुद के डॉक्टर बनने से बचें। प्रशिक्षित डॉक्टर की सलाह पर उनके द्वारा लिखी गई दवा का ही प्रयोग करें। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी डॉक्टर के पर्चे के बिना दवा नहीं देनी चाहिए। पिछले वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी एंटीबायोटिक दवाई के अधिक प्रयोग के बचने की सलाह दी थी।