शामली। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। इसी कारण जिले भर में 1145 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की चपेट में आ गई है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही जननी सुरक्षा योजना में ऐसी महिलाओं का उपचार हो रहा है। मगर, गर्भवती महिलाओं
में बढ़ती यह परेशानी चिंता का विषय है।
दरअसल, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर महिला एवं बाल विकास पुष्टाहार कार्यक्रम तथा जननी सुरक्षा योजना चल रही हैं। गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी की ओर से पुष्टाहार का वितरण किया जाता है।
सप्ताह में घी और दही के साथ ही फल वितरण की व्यवस्था है, लेकिन धरातल पर ऐसे कार्यक्रमों का लाभ गर्भवती महिलाओं को नहीं पहुंच पा रहा है। वर्ष 2016 में प्रेगनेंसी के दौरान 45 महिलाओं की मौत एनीमिया सहित विभिन्न कारणों से हुई, जिसकी गवाही सरकारी आंकडे़ देते हैं।
वहीं, हाल ही में हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) दिवस पर जारी आंकड़ों में जिले में 1145 महिलाएं एचआरपी की श्रेणी में शामिल हुई। इनमें 95 प्रतिशत से अधिक महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा बेहद कम पाई गई है।
जो खतरे के संकेत हैं। एसीएमओ डॉ. सफल कुमार का कहना है कि 1145 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी में है, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार दिलाया जा रहा है। हर महीने की नौ तारीख पर उनका चेकअप किया जाता है।
क्या होता है एचआरपी ?
जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। स्वास्थ्य परीक्षण में यदि महिला को कोई बीमारी हो जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटिक, पूर्व में ऑपरेशन से डिलीवरी हो चुकी है, या एनीमिया आदि हो, ऐसी महिलाओं को एचआरपी (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी महिलाओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है तथा डिलीवरी होने तक स्वास्थ्य कर्मी महिला के संपर्क में रहते हैं।
1107 महिलाएं एनीमिया की शिकार
हाई रिस्क प्रेगनेंसी की सूची में शामिल 1145 गर्भवती महिलाओं में सर्वाधिक 1107 महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। इन महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात प्रतिशत से कम है। इसके अलावा 38 महिलाएं शुगर, ब्लड प्रेशर आदि परेशानी की वजह से इस श्रेणी में शामिल हैं।
ऊन ब्लाक की सबसे बुरी हालत
आंकड़ों के अनुसार हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली जिले भर में 1145 महिलाओं में से सबसे ज्यादा 577 महिलाएं ऊन ब्लाक की है। कांधला ब्लाक की 192 महिलाएं है, तीसरे नंबर पर कैराना ब्लाक क्षेत्र की 127 महिलाएं तथा चौथे नंबर पर थानाभवन 113, शामली शहरी 42 महिलाएं तथा कुड़ाना पीएचसी क्षेत्र की 94 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी में शामिल हैं।
कैसे एनिमिया की शिकार होती हैं महिलाएं
डाक्टरों का मानना है कि गर्भवती होने के बाद महिला का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। खासकर खानपान अच्छा रखना है। यदि खानपान सही नहीं है और महिला को समय पर पौष्टिक आहार नहीं दिया जाता है या तो उसका हीमोग्लोबिन कम हो जाता है और वह एनीमिया की शिकार हो जाती है।
डाक्टरों की राय, बरतें सावधानी
इस संबंध में डाक्टर जगमोहन का कहना है कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी में शामिल महिलाओं को हर हाल में अपना ख्याल रखना चाहिए। शुद्घ और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। साथ ही डिलीवरी होने तक समय-समय पर अस्पताल में अपनी जांच कराते रहना चाहिए। अस्पताल में जांच निशुल्क है। इसके साथ ही डिलीवरी अस्पताल में ही कराई जानी चाहिए।