कैराना के गांव ऐरटी में लंपी से ग्रस्त गौरव शर्मा की गाय-संवाद
शामली। लंपी (एलएसडी) ने दुधारू पशुओं के साथ पशुपालकों की कमाई पर भी चोट शुरू कर दी है। बीमार पशुओं की दुग्ध क्षमता आधे से भी कम रह गई है, जिस कारण पशुपालक घाटा झेल रहे हैं।
इसके अलावा बीमारी से पशुओं की मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर स्वास्थ्य विभाग समय पर टीकाकरण करता तो काफी हद तक बीमारी से राहत मिल जाती।
n बीमारी से पशुओं की हुई मौत से हुआ नुकसान : गांव कुड़ाना में पिछले एक सप्ताह में तीन से चार पशुओं की मौत हो चुकी है। गांव कुड़ाना निवासी सोहनबीरी ने बताया कि दो माह से गाय लंपी बीमारी से ग्रस्त थी। दो दिन पहले गाय की मौत हो गई। दो माह में बीमारी पर 20 से 30 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन पशु नहीं बचा। खूनी पट्टी निवासी रीता ने बताया कि कुछ दिन पहले ही वह 1 लाख 50 हजार रुपये की गाय पंजाब से लाई थीं। एक सप्ताह पहले बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई।
इसके बाद दूसरी गाय भी मर गई। गांव कुड़ाना के जयबीर, सतेंद्र, बिंदर और देवेंद्र ने भी बताया कि पिछले सप्ताह उनकी भी एक-एक गाय बीमारी के चलते मर गई है। गांव बरलाजट निवासी सुरेशपाल और मोंटी ने बताया कि बीमारी के कारण उनकी भी गाय की मौत हो गई।
लंपी के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता घटी : गांव कुड़ाना के रविंद्र ने बताया कि उनकी गाय भी लंपी बीमारी से ग्रस्त है। उसका दूध 12 लीटर से घटकर दो लीटर रह गया है। गांव ऐरटी निवासी संजय शर्मा ने बताया कि करीब आठ दिन पहले उनकी गाय को लंपी हो गया था।
सरकारी अस्पताल में उपचार के बाद अब बीमारी कुछ कम हो गई है, लेकिन गाय ने दूध देना बहुत कम कर दिया है। गांव के ही गौरव शर्मा ने बताया कि उनकी गाय को भी लंपी हो गई थी। उपचार के बाद अब गाय ठीक हो रही है, लेकिन ठीक से चारा नहीं खा रही है और दूध भी बहुत कम दे रही है।