जिला अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस यूनिट और आपात सेवा
शामली। गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों को डायलिसिस के लिए अब बाहर दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। जिला संयुक्त चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट चालू हो गई है। पहले दिन दो मरीजों की डायलिसिस की गई। इसके अलावा जिला अस्पताल में आपात सेवा (इमरजेंसी) भी शुरू की गई है, लेकिन पहले दिन कोई मरीज नहीं पहुंचा।
गांव मुंडेट के निकट पूर्वी यमुना नहर पटरी के किनारे नवनिर्मित जिला संयुक्त चिकित्सालय में सोमवार से डायलिसिस यूनिट चालू कर दी गई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि पीपीपी मॉडल के तहत एसकेज संजीवनी प्राइवेट लि. कंपनी द्वारा डायलिसिस की दो मशीनें लगाई गई है। मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही मशीनों की संख्या बढ़ती जाएगी और अधिकतम दस मशीनों तक लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि मरीजों को डायलिसिस की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। पहले दिन दो मरीजों की डायालिसिस की गई, जिनमें एक मरीज जलालाबाद क्षेत्र का और दूसरी महिला मरीज कांधला की निवासी थी। डायलिसिस यूनिट चालू होने से अब गुर्दे के मरीजों को बाहर दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। यह सुविधा चालू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। डायलिसिस के लिए संजीवनी कंपनी के स्टाफ में दो डायलिसिस टेक्नीशियन नीरज गुप्ता व नितिन कुमार, जीएनएम नर्सिंग स्टाफ रविता राणा, टेक्नीकल कोर्डिनेटर हृदयपाल पहुंच गए हैं। टेक्नीकल कोर्डिनेटर ने बताया कि उनकी कोलकाता की एसकेज संजीवनी कंपनी का अनुबंध राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से हुआ है। डायलिसिस कराने वाले मरीजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उधर, जिला अस्पताल में इमरजेंसी भी शुरू कर दी गई है। हालांकि पहले दिन कोई मरीज नहीं पहुंचा है। इमरजेंसी में तीन चिकित्सकों की शिफ्टवार 24 घंटे ड्यूटी रहेगी।
दिन में एक मशीन पर तीन मरीजों की होगी डायलिसिस
सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि एक मरीज की डायलिसिस पूरी होने पर चार से साढ़े चार घंटे का वक्त लगता है। सुबह छह बजे से रात आठ बजे तक एक मशीन पर तीन मरीज की डायलिसिस होगी। फिलजहा दो मशीनें लग चुकी है। इस तरह से छह मरीजों की डायलिसिस एक दिन में किए जाने की व्यवस्था चालू हो गई है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति न होने से गंभीर मरीज होंगे रेफर
जिला संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार से इमरजेंसी सेवा शुरू तो कर दी गई है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की शासन स्तर से नियुक्ति न होने से गंभीर मरीजों को रेफर ही करना पड़ेगा। जिला अस्पताल में तैनात किए गए तीनों चिकित्सक एमबीबीएस है। इमरजेंसी सेवा के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला चिकित्सक आदि के अलावा पैरा मेडिकल स्टाफ होना चाहिए, तभी मरीजों को इसका पूरा लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही एक्सरे मशीन भी होना चाहिए,लेकिन अस्तपाल में चिकित्सकों व संसाधनों की कमी के चलते फिलहाल गंभीर मरीजों को हायर सेंटर ही रेफर करना पड़ेगा। सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की शासन से नियुक्ति हुई है, लेकिन अभी उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है। बाकी चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है।
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अब बर्न यूनिट में लगेंगे कोरोनारोधी टीके
शामली। जिला अस्पताल के भवन में एक तरफ टीकाकरण बूथ होने और दूसरी तरफ कोविड अस्पताल होने के कारण 16 अगस्त को बर्न यूनिट के भवन में ओपीडी चालू की गई थी। सोमवार को टीकाकरण के बूथ बर्न यूनिट में शिफ्ट कर दिए गए जबकि ओपीडी जिला अस्पताल में शिफ्ट हो गई है। सीएमएस ने बताया कि सोमवार को 41 नए मरीज और 10 पुराने मरीज ओपीडी में पहुंचे हैं, जिनकी जांच कर उपचार दिया गया।