ऊन। कथावाचक आचार्य विवेक शास्त्री ने भक्तों को भगवान वामन अवतार व समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ-साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए।
कस्बे के मुख्य बाजार स्थित धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक ने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन संपदा क्षण भंगुर होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान ने धर्म की रक्षा एवं भक्तों के उद्धार के लिए पृथ्वी पर अनेक अवतार लिए। जब भी पृथ्वी पर अधर्म व अत्याचार बढ़ा, तभी भगवान को विभिन्न अवतार लेकर पृथ्वी पर आना पड़ा। कथा व्यास ने मत्स्य अवतार, वराह अवतार, नृसिंह अवतार व वामन अवतार आदि का सुंदर वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
कहा कि ईर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। ऐसे व्यक्तियों को भगवान सूर्य, वायु, नदियों, बादलों व वृक्षों इत्यादि से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगवान सूर्य बिना किसी भेदभाव के सृष्टि के सभी प्राणियों को अपना प्रकाश देते हैं। वायु सभी जीवों में प्राणों का संचार करती है। इस अवसर पर नरेंद्र वर्मा, नरेश वर्मा, विक्की, प्रमोद, बबीता, कमलेश, शिरोमणि, सुनीता, नरेश गोयल, राखी, वीरेंद्र, आशु व आनंद आदि मौजूद रहे।