शामली। जिले में तीन करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से सीएचसी व पीएचसी पर बनाए गए इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज (ईसीआरपी) के भवनों कोई इस्तेमाल न होने पर जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। चिकित्सकों व संसाधनों के अभाव में मरीजों को इनका कोई लाभ नहीं मिल पाया है।
कोविड 19 महामारी को देखते हुए शासन ने जिले में सभी सीएचसी पर 20 बेड और पीएचसी पर छह बेड के ईसीआरपी भवनों का निर्माण कराया था। इनका उद्देश्य यह था कि भविष्य में संकट के समय मरीजों को तत्काल राहत व उपचार के लिए ईसीआरपी भवनों में ऑक्सीजन, आईसीयू बेड व पर्याप्त दवाओं जैसे संसाधनों के साथ चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ को नियुक्त किया जाना था।
जिले में प्रथम चरण में वर्ष 2021-22 एक करोड़ दो लाख आठ हजार रुपये की लागत से 11 पीएचसी पर ईसीआरपी भवनों का निर्माण हुआ। दूसरे चरण में 2022-23 में 70 लाख रुपये की लागत से सात पीएचसी पर भवन बनाए गए। इसी वर्ष 200-23 में छह सीएचसी पर 20 बेड के भवनों का निर्माण एक करोड़ 93 लाख 68 हजार रुपये की लागत से हुआ।
इन भवनों की पड़ताल की गई तो कहीं ताले लटके मिले तो कहीं पर जर्जर हालत में मिले। गांव कुड़ाना में ईसीआरपी के भवन पर ताला लटका मिला। इस भवन का इस्तेमाल स्टोर के रूप में किया जाना बताया गया। गांव कंडेला पीएचसी पर भवन जर्जर हालत में मिला। इसके चारों तरफ झाड़-झंकार खड़े हुए पाए गए। भवन के अंदर बदहाल अवस्था में पाया गया।
गांव लांक में भवन जर्जर हालत में पाया गया। ऊन सीएचसी पर भी भवन का इस्तेमाल स्टोर के रूप में किया जाना बताया गया। अन्य पीएचसी पर लगभग यहीं स्थिति पाई गई।
यहां पर हुआ भवनों का निर्माण
सीएचसी थानाभवन, कांधला, ऊन, कैराना, जसाला व कुड़ाना, पीएचसी बहावड़ी, भनेड़ा, लांक, फुगाना, राजपुर छाजपुर, गंगेरू, लिसाढ़, ऊंचा गांव, तितरवाड़ा, कंडेला, भूरा, चौसाना, हथछोया, गढ़ीपुख्ता, गढ़ीअब्दुल्ला, हरड़ फतेहपुर, जलालाबाद व बहावड़ी।
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कोट
जिले में बने ईसीआरपी भवनों की स्थिति के बारे में जानकारी की जाएगी। जहां पर जो कमियां है, उनकी मरम्मत कराकर सुधार कराया जाएगा।
- डॉ. कृष्ण गोपाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
गांव कंडेलेा में बना भवन। संवाद