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Shamli News: बीमा क्लेम न देने पर एलआईसी पर 10.60 लाख का जुर्माना

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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा बीमा क्लेम की धनराशि न देने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने एलआईसी को 10 लाख 60 हजाार रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है।
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गांव लिलौन निवासी पूनम ने आयोग में भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा शामली के प्रबंधक, मेरठ के मुख्य प्रबंधक और अजेंद्र निवासी गांव लिलौन के विरुद्ध आठ अगस्त 2023 को परिवाद दायर कराया था। परिवादिया ने बताया कि उनके पति सुधीर कुमार को अजेंद्र ने एलआईसी की पॉलिसी लेने के लिए कहते हुए उसके लाभ बताए। उनके पति ने 10 लाख रुपये की बीमा पाॅलिसी ली, जिसकी वार्षिक किस्त 61784 रुपये थी, जो एलआईसी शाखा शामली में जमा कराई थी।
बीमा पॉलिसी 17 अगस्त 2020 को जारी की गई, जिसकी अंतिम किस्त 26 जून 2034 को जमा की जानी थी और परिपक्वता तिथि 28 जून 2041 थी। उनके पति की 15 दिसंबर 2020 को घर पर ही मृत्यु हो गई। चिकित्सक ने दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु होना बताया था। इसके बाद परिवादिया ने एलआईसी शाखा शामली में क्लेम के लिए पॉलिसी प्रमाण पत्र व मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए। 22 जून 2021 को एलआईसी ने पत्र भेजा कि उनके पति-15-20 महीने से छाती के दर्द से पीड़ित थे, इसलिए पूर्व में कराए गए इलाज के पर्चे प्रस्तुत करें।
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इस संबंध में उसने शाखा प्रबंधक और मुख्य प्रबंधक को अवगत कराया कि उनके पति की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई है। इससे पहले उन्हें किसी तरह की कोई समस्या नहीं थी और न ही उनका कोई इलाज चल रहा था। उन्हें किसी व्यक्ति ने गलत सूचना दी। एलआईसी ने मृत्यु दावा पर कोई संज्ञान नहीं लिया, बल्कि एलआईसी ने अपने पत्र में नई बात यह लिख दी कि उनकी जानकारी में आया है कि बीमाधारक की मृत्यु सितंबर में हुई है, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र में 15 दिसंबर 2020 में दर्शाई गई है, लेकिन एलआईसी इसका कोई आधार नहीं बताया। आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद पर सुनवाई के बाद बीमा कंपनी को आदेशित किया कि वह बीमा क्लेम में वर्णित धनराशि 10 लाख रुपये मय छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज, बीमा क्लेम में प्रस्तुतीकरण की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक और परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करें। सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए बीमा कंपनी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को नहीं दी जाएगी, बल्कि नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
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