कैराना में पलायन करने वाले कैराना के व्यापारियों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। उनकी कीमती संपत्ति का दाम नहीं मिला। कुछ ने औने पौने दाम में संपत्ति बेच दी, तो कई व्यापारी ऐसे हैं जिनके मकान दुकान पर आज भी ताला लगा हुआ है।
सन 2000 में कैराना के प्रमुख सर्राफा वयापारी हरि प्रकाश मित्तल के पुत्र आलोक मित्तल की दुकान बंद करके घर जाते समय लूट के बाद हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद उनका परिवार सहारनपुर जाकर बस गया है। अमरनाथ पारवा की चौक बाजार में खाद बीज की तीन दुकानें 2005 से बंद पड़ी हैं।
मोहल्ला पट्टों वाला पर परचून की दुकान करने वाले व्यापारी राधे लाल को 5 लाख की रंगदारी की धमकी मिलने के बाद 2010 में उनका परिवार ऋषिकेश जाकर बस गया। उनका मकान आज भी वीरान पड़ा है। मकान में घास फूस उग आये हैं।
कैराना के सेठ जगदीश प्रसाद की 1990 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। रंगदारी की धमकी मिलने के बाद पलायन करके पानीपत गए। कोल्ड ड्रिंक्स एजेंसी संचालक ईश्वर चन्द मित्तल का मकान और दुकान आज भी वीरान पड़े हैं।
पार मंडल के अध्यक्ष अरविन्द सिंघल की बर्फ फैक्ट्री और मकान बंद पड़ा है। 10 साल पहले कैराना में जिस जमीन की कीमत 10 लाख रुपये थी आज उसी जमीन की कीमत घटकर सिर्फ 3 लाख रुपये तक रह गई है। इस कारण यहां से पलायन करने वालों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो व्यापार नये सिरे से जमाने की कवायद, दूसरे बडे़ शहरों में जमीन के भाव तेज तथा उनकी कैराना स्थित सैकड़ों वर्ष पुरानी जमीन के भाव कौड़ियों के हो गए।