पुलिस ने उर्दू में लिखे बरामद झंडे, पोस्टर आदि का उलमाओं से हिंदी अनुवाद कराया, जिसमें पता चला है कि झंडे पर उर्दू में अली वारिस शब्द लिखा गया था, यानी जिम्मेदार।
इसके अलावा तीन उर्दू के पोस्टर यहां से बरामद किए गए थे, जिन पर कुरआन-ए-पाक की चार कुलू की शूरते सूरह काफिरून (2) सूरह अल-इखलास (3) सूरह अल-फलक (4) सूरह अन-नास लिखी थी। इन्हें नमाज अता करने के दौरान पढ़ा जाता है।
इसके अलावा आयतल कुर्सी लिखा एक पोस्टर भी था। हरे और लाल हाथ के पंजे पर अली शब्द लिखा हुआ था। यानी अली को मानने के लिए सूरज का ब्रेनवाश किया जा रहा था।
इसी तरह सफर के दौरान कोई दिक्कत नहीं हो, इसके लिए कुरआन की एक आयत पढ़ी जाती है, जिसकी कुछ आयतें सूरज के यहां से मिली। इसके अलावा 11 रुपये के सिक्के भी मिले।
आशंका जताई जा रही है कि इन्हें धार्मिक स्थल में देने के लिए रखा गया होगा। धार्मिक क्रिया-कलाप करने वाली एक माला यानी तसबीह भी बरामद की गई। इसके अलावा बाइबिल की किताब और कुरआन भी यहां से बरामद की गई है।
पुलिस ने दंपती से पूछताछ की तो हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
मादलपुर में अनुसूचित जाति के परिवार के सूरज का धोखे से धर्मांतरण कराने वाला गिरोह शातिर है। दंपती और दिल्ली में रह रहा आरोपी कम पढे़-लिखे होने के बावजूद लोगों को चंगुल में लेने के साथ ही उनका ब्रेनवॉश करने में पढ़े-लिखों को भी फेल कर रहा है।
पुलिस के अनुसार दंपती में माही बनी कमरबतुन और शौकीन को थोड़ा बहुत उर्दू का तो ज्ञान है, लेकिन हिंदी या फिर अंग्रेजी में अनपढ़ है। इसके बावजूद दोनों इस तरह से ब्रेनवाॅश करते हैं जैसे कोई पढ़ा-लिखा कर रहा हो।
पुलिस की पूछताछ के दौरान भी दोनों ने जिस तरह सवालों के जवाब दिए, उससे साफ है कि दोनों काफी ट्रेंड हैं। पुलिस को गलत जवाब देकर बरगलाने का भी प्रयास किया गया गया। हालांकि पुलिस अभी इस तथ्य की जांच में जुटी है कि आखिर दोनों को ट्रेंड किया किसने हैं?
एसपी अभिषेक का कहना है कि दोनों काफी शातिर है। गलत जवाब देकर पुलिस को शुरूआत में बरगलाने का भी प्रयास कर रहे थे। जांच चल रही है। दिल्ली का गिरोह का सदस्य भी जल्दी ही पुलिस की गिरफ्त में होगा।