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कांग्रेस का था पहला विधायक, इस बार नोटा से भी हारे

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शामली। जिस पार्टी ने शामली विधानसभा सीट को पहला विधायक दिया, उसका इस बार चुनावों में बुरा हाल हो गया। जिला बनने के बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में शामली सीट अस्तित्व आई थी। पंकज मलिक शामली सीट से कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे। उन्हें 53947 वोट मिले थे। उन्होंने सपा के वीरेंद्र सिंह को 3741 वोट से हराया था। वीरेंद्र सिंह को 50206 वोट मिले थे। 2017 के उप चुनाव में पंकज मलिक दूसरे नंबर पर रहे थे। उन्हें भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल ने उन्हें 29720 वोट से हराया था। तेजेंद्र निर्वाल को 70085 वोट मिले थे। जबकि पंकज मलिक को 40365 वोट हासिल हुए। लेकिन इस बार कांग्रेस प्रत्याशी नोटा से भी हार गए। इस सीट पर 799 लोगों ने नोटा का प्रयोग किया। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को महज 780 वोट ही मिले हैं। इसके अलावा थानाभवन सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी सत्य संयम सैनी को 793 वोट मिले। वह नोटा से केवल चार वोट ज्यादा हासिल कर पाए। कैराना में कांग्रेस प्रत्याशी अखलाक को 1522 वोट मिले। वह चौथे स्थान पर रहे।
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आप ने पंजाब में सरकार बनाई, शामली में मुंह की खाई
शामली। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई है। जिससे पार्टी में जश्न का माहौल है। लेकिन शामली जिले में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। किसी भी विधानसभा सीट पर इस पार्टी के प्रत्याशी नोटा से ऊपर तक नहीं जा पाए। सबसे खराब हालत कैराना सीट पर रही। यहां पार्टी की प्रत्याशी संगीता 142 वोट के साथ अंतिम स्थान पर रहीं। यहां नोटा का प्रयोग 593 लोगों ने किया। शामली विधानसभा में आप प्रत्याशी 258 वोटों के साथ आठवें स्थान पर रहे। इस सीट पर 799 लोगों ने नोटा दबाया। थानाभवन सीट पर पार्टी के प्रत्याशी अरविंद देशवाल 674 सीटों के साथ आठवें स्थान पर रहे। इस सीट पर 789 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।
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