शामली। एक जनवरी से कम कीमत के रेडिमेड गारमेंट, जूते-चप्पल महंगे हो जाएंगे। स्टेशनरी पर भी जीएसटी बढ़ जाएगी। इसका असर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर ही पड़ेगा। व्यापारियों को भी इससे कारोबार प्रभावित होने की चिंता सता रही है।
पहले एक हजार रुपये से कम कीमत के कपड़ों पर पांच फीसदी जीएसटी लगती थी। अब यह बढ़कर 12 फीसदी हो जाएगी। इसके साथ ही 500 रुपये से कम के जूते-चप्पल पर कोई जीएसटी नहीं लगती थी। अब 100 रुपये की चप्पल पर भी 12 फीसदी लगेगी।
ऋषभ गारमेंट के रिक्की जैन ने बताया कि पहले ही ऑनलाइन शॉपिंग से रिटेलर कारोबारी संकट में है। अब सरकार के इस फैसले का भी असर उन पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर ग्राहक को 999 रुपये वाली शर्ट 1070 की मिलेगी।
विक्की शू स्टोर के कमल नरूला का कहना है कि कम कीमत के जूते-चप्पल गरीब व्यक्ति ही पहनता था। 500 रुपये तक के जूते-चप्पल पर कोई जीएसटी नहीं लगती थी। अब 12 फीसदी जीएसटी होने से उन पर असर पड़ेगा। जूते-चप्पल महंगे हो जाएंगे।
एश्वर्य फैशन के सतीश जैन का कहना है कि इससे व्यापारियों पर कोई भार नहीं पड़ेगा। ग्राहक को यह अतिरिक्त टैक्स देना होगा टैक्स चोरी खत्म होगी। कुछ लोग टैक्स बचाने के लिए कम कीमत का बिल लेते थे। जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचता था। अब ऐसा नहीं होगा।
उत्सव रेडिमेड गारमेंट की बबीता बंसल का कहना है कि कोरोना की मार से रेडीमेड का कारोबार अभी तक उभर नहीं पाया था। बाजार में मंदी की स्थिति है। सरकार के इस निर्णय से बिक्री पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।