शामली। मोबाइल फोन की लत अब बच्चों का बचपन छीनने के साथ उनके व्यवहार और पारिवारिक रिश्तों को भी प्रभावित कर रहा है। घंटों मोबाइल पर व्यस्त रहने वाले बच्चों से जब माता-पिता मोबाइल छीन रहे हैं तो कई बच्चे उन्हीं के खिलाफ पुलिस से शिकायत करने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के मन कक्ष में पिछले दो माह में ऐसे 10 मामले पहुंच चुके हैं। हर माह पांच से छह मामले सामने आ रहे हैं। मन कक्ष के अधिकारी बच्चों की काउंसलिंग कर समस्या का समाधान कराने में जुटे हैं।
पिता पर पिटाई का लगाया आरोप
रेलपार के कक्षा 11वीं के छात्र को लेकर परिजन जिला अस्पताल के मन कक्ष पहुंचे। परिजनों ने बताया कि छात्र सात से आठ घंटे तक मोबाइल पर व्यस्त रहता था। रात में भी मोबाइल में लगा रहता था। पिता ने मोबाइल छीना तो उसने पिटाई का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत कर दी। हालांकि पुलिस ने समझाकर मामला शांत करा दिया।
अध्यापक से ही कर दी अभद्रता
कांधला के रेलवे वाले क्षेत्र के कक्षा 10वीं के छात्र को लेकर परिजन मन कक्ष पहुंचे। बताया कि छात्र स्कूल में भी मोबाइल लेकर जाता है। विरोध करने पर अध्यापक से कई बार अभद्रता की जा चुकी है। यही नहीं, पुलिस से भी परिजनों के खिलाफ झूठी शिकायत कर दी।
माता-पिता पर ही लगा दिए आरोप
शहर के माजरा रोड के रहने वाले कक्षा आठवीं के छात्र को लेकर परिजन मन कक्ष पहुंचे। बताया कि मोबाइल छीनने पर छात्र माता-पिता के खिलाफ पुलिस से शिकायत करता है। वह दो बार शिकायत कर चुका है। मोबाइल के कारण वह समय पर खाना-पीना तक बंद कर देता है।
काउंसलिंग में ये समस्याएं आ रहीं सामने
उत्तेजित व्यवहार और पढ़ाई से जुड़ी समस्याएं गंभीर रूप से सामने आ रही हैं।
वर्चुअल दुनिया में रहने के कारण बच्चे वास्तविकता से दूर हो रहे हैं।
बच्चे सामाजिक माहौल में घुल-मिल नहीं पा रहे हैं।
छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने, गाली देने और पिटाई करने की शिकायतें आ रही हैं।
पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। मासिक टेस्ट में कम नंबर आ रहे हैं।
छोटी-छोटी बातों पर दूसरे बच्चों से लड़ने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
ये करें उपाय
बच्चों को सप्ताह में एक बार घुमाने ले जाएं।
बच्चे के साथ अधिक समय व्यतीत करें।
अपना समय बचाने के लिए बच्चे को मोबाइल न दें।
बच्चों का खेलों में रुझान बढ़ाएं।
सीमित समय तक मोबाइल का उपयोग करना सिखाएं।
सख्ती के बजाए प्यार से समझाएं
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार और मन कक्ष प्रभारी डॉ. अतुल बंसल का कहना है कि बच्चों में ऐसी लत तब लगती है, जब माता-पिता बच्चों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। बच्चों पर सख्ती के बजाए प्यार से समझाए। मोबाइल का लती होने पर धीरे धीरे उसकी आदत में बदलाव लाएं।