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Shamli News: कार्यकर्ताओं को खुद गाड़ी भेजकर दिल्ली बुलवाते थे चौधरी चरण सिंह

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शामली। किसानों के मसीहा और देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की मंगलवार को 123वीं जयंती है। उनका शामली और आसपास के क्षेत्रों से गहरा और आत्मीय रिश्ता रहा है। वह जाति-पात से ऊपर उठकर किसानों, गांव और खेती को देश की असली ताकत मानते थे। जिले में उनका आना-जाना लगा रहता था और वह कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनते थे।खास बात यह थी कि वह अपने कार्यकर्ताओं को खुद की गाड़ी भेजकर दिल्ली बुलवाते और उनसे घंटों विचार-विमर्श करते थे।
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पूर्व सांसद अमीर आलम खां बताते हैं कि वर्ष 1985 की बात है, जब हरेंद्र मलिक सुबह चौधरी चरण सिंह के दिल्ली स्थित तुगलक रोड आवास पर पहुंचे। उन्हें देखते ही चौधरी साहब ने पूछा कि अमीर आलम खां कहां हैं और तुरंत उन्हें बुलाने के लिए गाड़ी भेजने को कहा। इसके बाद चौधरी साहब की भेजी गाड़ी से वह सीधे दिल्ली पहुंचे। वहां चौधरी साहब ने उनसे मुजफ्फरनगर के मेहंदी असगर को पार्टी में लेने को लेकर राय ली और सहमति मिलने के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया गया। इससे चौधरी साहब की लोकतांत्रिक सोच और कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का भाव झलकता है।

इसी तरह जलालाबाद के विधायक अशरफ अली बताते हैं कि उनके ताऊ पूर्व सांसद गय्यूर अली खां के पास वर्ष 1980 में चौधरी चरण सिंह और माता गायत्री देवी पहुंचे थे। उस दौरान एक सभा में चौधरी साहब ने एलान किया था कि गय्यूर अली मुजफ्फरनगर से पार्टी का चुनाव लड़ेंगे, क्योंकि उनसे ज्यादा ईमानदार व्यक्ति उन्हें नहीं लगता कोई है। यह उनके नेतृत्व की पहचान थी कि वह ईमानदारी और जनसेवा को सर्वोपरि रखते थे।
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कई ने चौधरी चरण सिंह से सीखी राजनीति

शामली। चौधरी चरण सिंह के सान्निध्य में रहकर जिले के कई दिग्गज नेताओं ने अपनी राजनीति की शुरुआत की। इनमें चौधरी अजब सिंह, उनके भतीजे वीरेंद्र सिंह, हरेंद्र मलिक, अमीर आलम खां, बाबू सिंह, गय्यूर अली, हरपाल पंवार और डॉ. जसवीर सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इन नेताओं ने चौधरी साहब के विचारों को आत्मसात कर जनसेवा की राह चुनी।
आज दी जाएगी श्रद्धांजलि

जिले में आज भी उनके योगदान की यादें जीवित हैं। दिल्ली-शामली-सहारनपुर मार्ग पर कांधला, शामली गन्ना सहकारी समिति कार्यालय, धीमानपुरा गुरुद्वारा और शामली-मुजफ्फरनगर मार्ग पर लालूखेड़ी में उनकी प्रतिमाएं स्थापित हैं। हर वर्ष उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर उनके अनुयायी कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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