शामली। पर्यटकों, लोगों को लुभाने के लिए जल्द ही जिले के बीबीपुर हटिया और बरनावी गांव में चंडीगढ़ शहर की तर्ज पर तितली पार्क विकसित किया जाएगा। तीन एकड़ भूमि में पार्क बनाने की तैयारी है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने तैयारी कर ली है।
जिले में कोई भी तितली पार्क नहीं है। खेड़ीकरमू गांव में जैव विविधता पार्क की तैयारी थी, मगर अभी तक पार्क स्थापित नहीं हो सका है। वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जल्द ही चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों की तर्ज पर जिले में तितली पार्क की स्थापन कराई जाएगी। इसके लिए वन विभाग के पास बीबीपुर हटिया, बरनावी गांव में जमीन है। प्रयास रहेगा कि दो से लेकर तीन एकड़ में पार्क को स्थापित किया जाए।
पार्क में गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी समेत 30 से अधिक प्रजाति के फूलों के पौधे तितली की तरह ही लाइन में लगाए जाएगे, पौधों को भी तितली का रूप दिया जाएगा। इसके अलावा तितलियों से मनुष्य जीवन में होने वाले फायदे पार्क में अंकित किए जाएंगे। ताकि लोग तितलियों के संरक्षण के लिए आगे आए।। इसके अलावा तितलियों के संरक्षण के लिए यहां पर तितलियों की विभिन्न प्रजातियों को भी छोड़ा जाएगा। साथ ही तितलियों के रहने के लिए अनुकूल माहौल भी देने का प्रयास किया जाएगा। पार्क के निर्माण के बाद तितलियों की देखरेख के लिए भी अलग से स्टाफ को तैनात किया जाएगा।
सर्वे में जिले में तितलियों की संख्या में गिरावट की गई थी दर्ज
हाल ही में पर्यावरण प्लानर, प्रोफेसर, वन विभाग ने जिले में सर्वे कराया था। पर्यावरण प्लानर डॉ. उमर सैफ के अनुसार सर्वे में तितलियों की संख्या में गिरावट दर्ज की थी। सामान्य प्रजातियां जैसे सादा टाइगर, सामान्य घास पीला, सामान्य यात्री, सामान्य नीला, भारतीय स्किपर, सामान्य तेंदुआ, लाल पियरो, सामान्य जेजेबेल, नींबू पतंग और सामान्य गुलाब सभी की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। प्रजातियों को बचाने में तितली पार्क अहम भूमिका निभाएगा।
तितलियों की प्रजातियां कम होने के ये हैं प्रमुख कारण
पर्यावरण विद और रिसर्चर डाॅ. सोनू, प्रोफेसर डाॅ. उमर के अनुसार वनों की कटाई और शहरीकरण के कारण प्राकृतिक आवासों का खत्म होना, अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग और जलवायु परिवर्तन इन तितलियों के लिए खतरा बन रहे हैं। ये तितलियां परागण को बढ़ावा देकर पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इनका गायब होना स्थानीय वनस्पतियों और जीवों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
जिले में सर्वे में 42 से अधिक प्रजातियों की तितलियां मिली थी
सर्वे में जिले में सादा टाइगर, सामान्य घास, सामान्य यात्री, सामान्य नीला, सामान्य गुलाब, भारतीय स्किपर, सामान्य तेंदुआ, प्लेन टाइगर, कॉमन गुल, व्हाइट ओरेंज टिप, कॉमन ग्रास, येलो, ऑरेंज टिप, कॉमन गुल, रेड पैर, सामान्य जेजेबेल आदि समेत 42 प्रजातियों की तितलियां मिली थी।