शामली। दिन का कोरोना कर्फ्यू खत्म होने के दस दिन बाद भी जिले में सराफा बाजार अभी तक पटरी पर नहीं लौटा है। कोरोना की दहशत के बीच बाजार में बहुत कम ग्राहक खरीदारी के लिए आ रहे हैं।
जिले में कोरोना संक्रमण काल से पहले सात-आठ करोड़ रुपये का सराफा का कारोबार था। इस साल अप्रैल और मई में शादी-विवाह का सीजन अधिक था। लेकिन दोनों महीने कोरोना संक्रमण काल की भेंट चढ़ गए। दिन और रात का कर्फ्यू लागू होने से पूरा कारोबार चौपट हो गया। एक जून से दिन का कोरोना कर्फ्यू खत्म होने के बाद भी सराफा कारोबार पटरी पर नहीं आया है। जून और जुलाई में शादी विवाह बहुत कम हैं। बाजार में एक तिहाई ग्राहक आ रहे हैं, वे भी पाजेब, अंगूठी, टॉप्स जैसे जेवर खरीद रहे हैं। सोने-चांदी के कंगन, गले का हार, चेन की डिमंाड नहीं के बराबर है।
शहर के नाला पटरी रोड स्थित रविसंगल का कहना है कि शामली, कैराना, कांधला, थानाभवन, जलालाबाद, गढ़ीपुख्ता,बनत, झिंझाना-ऊन आदि कस्बों में सोने चांदी के जेवरात बनाने और बेचने वाली करीब 1100 दुकानें हैं। जहां कोरोना काल से पहले सात-आठ करोड़ रुपये का कारोबार होता था वहीं दिन का कर्फ्यू खत्म होने के बाद एक तिहाई ग्राहक ही बाजार में आ रहे हैं। जून- जुलाई शादी-विवाह का बड़ा सीजन नहीं होने से छोटे ग्राहक ही खरीदारी कर रहे है। शहर के बड़ा बाजार निवासी पवन संगल का कहना है कि कोरोना के चलते ग्राहक डरा हुआ है। नवंबर-दिसंबर में शादी विवाह का सीजन आने में ग्राहकी बढ़ सकती है। दो सालों से कोरोना ने सराफा बाजार खत्म कर दिया है। जिले में एक दिन में एक करोड़ रुपये प्रतिदिन का कारोबार हो रहा है।
कैराना कस्बे में सराफा की 60-70 दुकानें है, जहां कोरोना से पहले दस लाख रुपये प्रतिदिन का कारोबार होता था। अब एक लाख रुपये प्रतिदिन पर कारोबार सिमट गया है। सराफा व्यापारी दीपक वर्मा ने बताया कि सोने चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं। कोरोना महामारी व लॉकडाउन के कारण लोगो के सामने पैसों की समस्या बनी हुई है, जिससे सराफा कारोबार चौपट होता जा रहा है। सराफा व्यापारी प्रदीप वर्मा ने बताया कि तेज गर्मी में गांव के लोग जेवर खरीदने घरों से बाहर कम ही निकलते हैं। फिलहाल सोने चांदी का भाव भी बहुत ज्यादा है। साथ ही कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन के चलते सराफा कारोबार बहुत ही मंदा चल रहा है।