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राष्ट्रीय युवा दिवस: यूपी में जमीनी हकीकत, आखिर कैसे चमके युवाओं की प्रतिभाएं, न संसाधान न सुविधाएं

Tue, 12 Jan 2021 02:23 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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शामली में शहीद उधम सिंह स्टेडियम - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में युवाओं के लिए सुविधाओं और संसाधनों का टोटा है। करीब दो दशक पूर्व बने एक मात्र शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम भी सिर्फ नाम का है। वहां पर खेल का सामान तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में युवाओं को अभ्यास करने की कोई सुविधा यहां नहीं है।

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शहर में भैंसवाल रोड पर शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम करीब दो दशक पहले बना था। स्टेडियम बनने के समय जो खेल का सामान आया था, वह भी खराब हो चुका है और टूटा फूटा पड़ा हुआ है। इसके बाद से कोई सामान खिलाड़ियों के लिए नहीं आया है। खिलाड़ियों के लिए संसाधन और सुविधाएं नहीं होने से खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए बाहर जाना पड़ता है।

जिला स्टेडियम न क्रीड़ा विभाग का दफ्तर
शामली को 28 सितंबर 2011 को नया जनपद बनाया गया था। जनपद को बने हुए नौ साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां पर जिला क्रीड़ा विभाग का कार्यालय तक नहीं खुल पाया है। इसके अलावा जिला स्टेडियम के लिए गांव भैंसवाल में भूमि चिह्नित की गई है, लेकिन इसके निर्माण के लिए बजट स्वीकृत नहीं हो सका है।
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कुश्ती, कबड्डी व निशानेबाजी में चमके खिलाड़ी
कबड्डी में गांव बंतीखेड़ा, हसनपुर, बनत, भारसी, कनियान, भभीसा, दथेड़ा आदि गांव के युवाओं ने अपने दम पर अच्छा प्रदर्शन कर जनपद का नाम रोशन किया है। गांव के बंतीखेड़ा के करीब 15 खिलाड़ी सरकारी नौकरियों पर तैनात हैं। शहर में शामली रायफल क्लब, गोल्ड स्टार रायफल क्लब, खेड़ीकरमू में मुनव्वर मंसूरी क्लब, माजरा रोड स्थित पिंटू कुश्ती व्यायामशाला, गांव भैंसवाल में शहीद भगत सिंह अखाड़े में क्षेत्र के युवा प्रशिक्षण लेकर राज्य और नेशनल स्तर तक प्रतिभाग कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। अन्य खेलों में यहां के युवाओं ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

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ये बोले खिलाड़ी
गांव बंतीखेड़ा निवासी कबड्डी के नेशनल खिलाड़ी दीपचंद सिंह ने बताया कि जिले में खिलाड़ियों के लिए सरकारी स्तर पर कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने गांव से सीनियर खिलाड़ियों से दांवपेंच सीखे। वे अब तक 11 राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में प्रतिभाग कर आठ मेडल जीत चुके हैं। इसके अलावा 22 इंडिया गेम में प्रतिभाग कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि सरकार को खेल सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।

शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी वेट लिफ्टर मयंक कुमार ने बताया कि जनपद में खेल की कोई सुविधा नहीं है। पिछले साल गाजियाबाद में आयोजित अंतर महाविद्यालयीय वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक समेत कई पदक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन करने वाले मयंक ने बताया कि शामली में सुविधा न होने के कारण उन्हें बागपत में अभ्यास करना पड़ा।

शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम बनने के समय ही खेल का सामान आया होगा। वह सामान पुराना और खराब हो चुका है। इसके बाद स्टेडियम में खेल का कोई नया सामान नहीं आया है। - एमएस तोमर, प्रभारी युवा कल्याण अधिकारी।

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