शामली। थानाभवन और ऊन चीनी मिलों पर करीब 190 करोड़ रुपये के बकाया गन्ना भुगतान, आवारा पशुओं की समस्या, बिजली बिल और अन्य मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने मंगलवार को कलक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान जिलाधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने से किसान भड़क गए और कलक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
मौके पर अपर जिलाधिकारी पहुंचे जिस पर किसान डीएम को बुलाने पर अड़े थे और अपर जिलाधिकारी से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। करीब आधे घंटे तक चले हंगामे के बाद जिलाधिकारी आलोक यादव मौके पर पहुंचे, जिसके बाद किसानों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
जिलेभर से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने फ्री ट्रेड डील के विरोध में नारेबाजी करते हुए इसे किसान विरोधी बताया। साथ ही बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने, मुफ्त बिजली का वादा पूरा करने और किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने की मांग की।
भाकियू जिलाध्यक्ष शांता प्रधान ने कहा कि थानाभवन और ऊन चीनी मिलों पर करीब 190 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। किसानों को ब्याज सहित भुगतान कराया जाए। इसके अलावा सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित किया जाए, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जाए तथा किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की भी कड़ी निंदा की। भाकियू पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान जिलाध्यक्ष शांता प्रधान, बत्तीसा खाप के चौधरी शोकिंद्र, प्रदेश उपाध्यक्ष कपिल खाटियान, कुलदीप पंवार, मास्टर जाहिद, गौतम पंवार, योगेंद्र कुमार, सुशील कुमार, अमरपाल बालियान मौजूद रहे।
सुरक्षा के मद्देनजर कलक्ट्रेट बना छावनी
भाकियू के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती के साथ मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की जांच की गई। अधिकारियों ने पूरे प्रदर्शन के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रखी। हंगामे के बावजूद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद किसान शांतिपूर्वक लौट गए।