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Shamli News: 1857 की क्रांति में भैंसवाल के भवानी सिंह बने नायक, बेटे हरिकेश पंवार ने दी शहादत

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भैंसवाल के प्रसिद्ध किसान नेता भवानी सिंह का योगदान इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वह भैंसवाल के जमींदार जसराम के चार पुत्रों में तीसरे नंबर के थे। स्वतंत्रता आंदोलन की रणनीति बनाने में बाबा मोहर सिंह सक्रिय भूमिका निभाते थे।
अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भवानी सिंह ने बाबा मोहर सिंह के साथ मिलकर शामली तहसील और कलक्ट्रेट वर्ल्ड आवास को आग के हवाले कर दिया था। इसके बाद कई माह तक फरार रहे और गुप्त ठिकानों से क्रांति की योजना चलती रही।
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भवानी सिंह के ज्येष्ठ पुत्र हरिकेश पंवार भी युवावस्था में ही इस आंदोलन में कूद पड़े। बनत–फतेहपुर गांव के पास अंग्रेजी सेना के साथ मुठभेड़ में वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनका पार्थिव शरीर परिवार को नहीं मिल सका। भवानी सिंह और हरिकेश के साथ उनके भाई परमानंद व कुंदन सिंह भी आंदोलन में सक्रिय रहे। वर्तमान में उनके वंशज योगेंद्र सिंह, नरेंद्र पंवार, सुनील पंवार, विजेंद्र सिंह, मांगेराम, मास्टर सुखवीर, राजीव पंवार सहित कई लोग गांव में रह रहे हैं। इनके वंश के बाबा सूरजमल थे। उमेश पंवार प्रधान रह चुके हैं और मौजूदा समय में जिला पंचायत सदस्य हैं। वहीं, डॉ. रणधीर सिंह आरके डिग्री कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं।
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