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कानून के बाद कम हुई महिलाओं की पीड़ा

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शामली। तीन तलाक कानून (मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण) को आज एक साल पूरा हो गया है। इस कानून के बन जाने से महिलाओं को काफी राहत मिली है। छोटी सी बात पर तीन तलाक दे देने का चलन कानून के डर से कुछ कम हुआ है। एक साल में कुल 19 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जबकि बहुत से मामलों में कानून के डर से समझौता करा दिया गया।
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एक साल पहले 30 जुलाई को तीन तलाक पास हुआ था। तीन तलाक कानून बनने के बाद पीड़ित महिलाओं की शिकायतों पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। इस कानून के तहत एक साल में जनपद के कैराना, कांधला, झिंझाना, थानाभवन और गढ़ीपुख्ता में कुल 19 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें कांधला थाने में सबसे अधिक छह मुकदमे दर्ज हुए। जिनमें एक मुकदमा झूठा पाए जाने पर खारिज हुआ, जबकि थानाभवन थाने में तीन मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें साक्ष्य के अभाव में एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई। झिंझाना थाने पर तीन मुकदमों में एक मुकदमे में कार्रवाई प्रचलित है। इसके अलावा गढ़ीपुख्ता में दो और कैराना थाने पर पांच मुकदमे दर्ज हुए। इस तरह से 16 मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इन सभी मुकदमों में कुल 71 आरोपी नामजद हुए थे, जिनमें नौ आरोपियों की नामजदगी गलत पाई गई थी। बाकी 62 आरोपियों में पुलिस ने 31 को गिरफ्तार किया, जबकि 24 आरोपी कोर्ट में हाजिर हुए हैं। प्रचलित मुकदमे में सात आरोपियों का कोर्ट से स्टे चल रहा है।
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तीन तलाक के दर्ज मुकदमों की थानावार स्थिति
थाना : दर्ज मुकदमों की संख्या
कैराना : 5
कांधला : 6
झिंझाना : 3
थानाभवन : 3
गढ़ीपुख्ता : 2
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कोट
तीन तलाक के मामलों में कमी आई
छोटी-छोटे पारिवारिक विवादों में तीन तलाक देना महिलाओं के साथ अन्याय है। तीन तलाक कानून बनने से महिलाओं को न्याय मिला है। इस कानून को लेकर महिलाएं खुश हैं। कानून बनने के बाद तीन तलाक के मामलों में कमी आई है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आपसी विवाद के कई मामलों में समझौते हुए और महिलाएं अपने पति के साथ रह रही हैं। - इशरतजहां, एडवोकेट।
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एक साल में तीन तलाक से संबंधित लगभग 20 से अधिक शिकायतें सामने आईं। सभी मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते हुए हैं। महिलाएं अपने पति के साथ खुशी से रह रही है। महिला थाने पर कोई मुकदमा तीन तलाक के संबंधित दर्ज नहीं हुआ है। - नीरज चौधरी, प्रभारी महिला थाना।
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कानून बनने से कोई खास फर्क नहीं पड़ा
तीन तलाक को लेकर कानून बना है, थानों में एफआइआर भी दर्ज हुई हैं। यह कानून बनने से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। पहले की तरह आज भी समाज के मौअज्जिज लोगों के बीच इस तरह के मामले निबटाकर पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाया जाता है, जबकि कानून का सहारा लेने से महिलाओं को न्याय के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। - मौलाना मोहम्मद साजिद कासमी, जिला सदर जमीयत उलमा ए हिंद।
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जनपद में तीन तलाक से संबंधित अब तक 19 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें 16 मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एक मुकदमा खारिज हुआ है, जबकि एक में फाइनल रिपोर्ट लगी है। एक मुकदमे में कार्रवाई प्रचलित है। जांच में दोषी पाए गए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। - विनीत जायसवाल, एसपी।
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