शामली। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन का खेल भी निराला है। कहीं दो बच्चों पर दो शिक्षक तैनात हैं तो कहीं तीन छात्रों के लिए तीन शिक्षक मौजूद हैं। वहीं कहीं पर 500 बच्चों पर सिर्फ छह शिक्षक ही है। इस बेमेल समायोजन ने सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पर ग्रहण ही लगा दिया है।
सोमवार को रिपोर्टर ने पड़ताल कि तो ये नजारा मिला जिसमें गांव लिसाढ़ के मजरा बादशाहपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में केवल दो बच्चे पंजीकृत मिले, जबकि वहां दो शिक्षक तैनात हैं। एक छात्र कक्षा दो और दूसरा कक्षा चार में पढ़ रहा है।
लिसाढ़ के मजरा खिजरपुर में भी केवल तीन बच्चे पंजीकृत हैं जिनके लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। भैंसवाल के मजरा नहर माजरा में 14 बच्चों को चार शिक्षक पढ़ा रहे हैं। थानाभवन क्षेत्र के सूरजपुर में तीन बच्चों के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं, जबकि ऊन ब्लॉक के वेदखेड़ी के मजरा पावटी खुर्द में करीब 10 बच्चों पर तीन शिक्षक कार्यरत हैं। संवाद
कहीं बच्चे अधिक और शिक्षक कम
कुछ परिषदीय स्कूल ऐसे भी जहां बच्चे अधिक है और शिक्षकों की बड़ी कमी है। थानाभवन ब्लॉक के गांव भैसानी इस्लामपुर के प्राथमिक स्कूल में लगभग 500 बच्चे हैं और शिक्षक केवल छह है। इसी गांव के उच्च प्राथमिक स्कूल में 300 बच्चों पर केवल दो ही शिक्षक तैनात है। प्राथमिक विद्यालय ज्ञानीपुर में 90 बच्चों पर दो शिक्षक है।
नगर के स्कूलों का भी बुरा हाल
शामली नगर में नौ स्कूल संचालित है। इनमें अधिकतर स्कूल एक-एक शिक्षक और शिक्षामित्र के भरोसे चल रहे है, यहां शिक्षकों की कमी है।
बच्चे कम, शिक्षक ज्यादा—संतुलन बिगड़ा
इन आंकड़ों से साफ है कि कई स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात पूरी तरह असंतुलित है। जहां एक ओर कुछ स्कूलों में संसाधनों की अधिकता है, वहीं दूसरी ओर बच्चों की कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
स्कूल चलो अभियान भी नहीं ला सका बदलाव
सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्कूल चलो अभियान के बावजूद नामांकन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों का रुझान अभी भी निजी स्कूलों की ओर अधिक देखा जा रहा है।
पहले भी हो चुका है विलय
पूर्व सत्र में जुलाई माह में प्रदेश सरकार के निर्देश पर 50 से कम छात्र संख्या वाले और एक किलोमीटर के दायरे में स्थित करीब 80 स्कूलों का विलय किया जा चुका है। इसके बावजूद कई स्कूलों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आदेश मिलने पर फिर होंगे विलय
बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर ने बताया कि पहले चरण में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलय किया जा चुका है। अगले चरण में भी शासन के निर्देश पर ऐसे स्कूलों का विलय किया जाएगा, जहां दूरी अधिक होने के बावजूद व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
नामांकन बढ़ाना ही समाधान
बीएसए लता राठौर के अनुसार यदि शिक्षकों को अपने स्कूलों को विलय से बचाना है तो उन्हें गांव-गांव जाकर अभिभावकों को जागरूक करना होगा। सरकारी योजनाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जानकारी देकर नामांकन बढ़ाना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों की संख्या कम ज्यादा होने का मामला जानकारी में नहीं है। बीएसए से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
अरविंद कुमार चौहान, जिलाधिकारी