तीन दिन तक गंगनहर किनारे पड़ा रहा शव
आरोपी ने 10 जनवरी को ममता की हत्या की थी। शव तीन दिन तक गंगनहर कांवड़ पटरी मार्ग के किनारे पड़ा रहा। हैरानी की बात यह रही कि इस मार्ग से लगातार लोगों का आवागमन और पुलिस गश्त होती रही, लेकिन किसी की नजर शव पर नहीं पड़ी।
इस तरह शुरू हुआ प्रेम प्रसंग
आरोपी संदीप की पत्नी की 2012 में मौत हो चुकी थी। वह एक टिफिन सेंटर से खाना मंगवाता था, जहां ममता खाना बनाती थी। वहीं से दोनों की बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे प्रेम संबंध बन गए। ममता आरोपी के घर आकर खाना बनाने लगी थी।
नशीली चाय पिलाकर की हत्या
10 जनवरी को आरोपी ने ममता को घर बुलाया और चाय में नशीली गोली मिलाकर पिला दी। बेहोशी की हालत में आरोपी ने मुंह और नाक दबा दी और चेहरे व सिर पर टेप चिपका दिया, जिससे दम घुटने से ममता की मौत हो गई।
कॉल डिटेल से खुला राज
पुलिस जांच में सामने आया कि ममता के फोन पर सबसे ज्यादा कॉल आरोपी संदीप की थीं। हत्या के बाद आरोपी ने शक से बचने के लिए ममता के मोबाइल से उसके परिचित को कॉल किया और फिर मोबाइल तोड़कर नहर में फेंक दिया।
गुमशुदगी से शव बरामदगी तक
10 जनवरी की शाम ममता काम की तलाश में निकली थी। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। पति ने थाने में तहरीर दी, पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। 14 जनवरी को बालाजीपुरम के सामने गंगनहर किनारे शव बरामद हुआ।