- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने बाइक के क्लेम का भुगतान निरस्त न करने पर टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुंबई व नई दिल्ली पर 92550 रुपये का जुर्माना लगाया है।
गांव मन्ना माजरा निवासी मुसयब ने छह अक्तूबर 2018 को आयोग में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुंबई के महाप्रबंधक, आशा ऑटो एजेंसीज झिंझाना रोड शामली के प्रोपराइटर और टाटा एआईजी जनरजल इश्योंरेंस कंपनी लिमिटेड नई दिल्ली प्राधिकृत व्यक्ति के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। परिवाद में बताया कि उसने अपनी 2017 मॉडल की बाइक का इंश्योरेंस आशा ऑटो एजेंसी के माध्यम से कराया था और प्रीमियम का भुगतान भी किया था, जिसकी अवधि पांच अगस्त 2017 से चार अगस्त 2018 तक थी।
24 अगस्त 2017 को वह बाइक ठीक कराने के लिए आशा ऑटो एजेंसी पर गया। कर्मचारी उसकी बाइक को एजेंसी के बाहर खड़ी कर ठीक कर रहे थे, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को एजेंसी का मिस्त्री बताकर बाइक को ट्राई करने के लिए ले गया। जब वह काफी समय बाद वापस नहीं आया तो उसने पहले से कार्य कर रहे मिस्त्री से पूछा तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। बाइक का असल इंश्योरेंस पॉलिसी व बिल बाइक में थे। इस घटना की रिपोर्ट शहर कोतवाली में दर्ज कराने के साथ ही एआरटीओ कार्यालय को भी सूचना दी गई।
वादी के मुताबिक उसने टाटा एआईजी जनरजल इश्योंरेंस कंपनी लिमिटेड नई दिल्ली से क्लेम मांगा, लेकिन उसने कहा कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेगी, उसके बाद ही क्लेम मिल सकता है। पुलिस ने तहकीकात के बाद अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दी। इसके बाद उसने फिर विपक्षी से संपर्क किया तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। बीमा कंपनी ने दो जनवरी 2018 को गलत तथ्यों से वादी का क्लेम निरस्त कर दिया।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अभिनव अग्रवाल ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुंबई और नई दिल्ली के विरुद्ध परिवाद स्वीकार करते हुए आदेश सुनाया कि वे बीमा पॉलिसी के अनुसार चोरी हुई बाइक की आईडीबी वैल्यू 47550 रुपये बीमा दावा प्रस्तुत करने के तीन माह बाद की तिथि से अंतिम अदायगी तक छह प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ और परिवादी को हुई मानसिक,आर्थिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति हेतु 20 हजार रुपये और वाद का खर्च पांच हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करें।
विपक्षी द्वारा सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार करने के लिए विपक्षी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि वादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष जमा किया जाएगी।