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Shamli News: सीमा विवाद के जख्म पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं

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कैराना में यमुना पुल के पास बनाये जा रहे यूपी हरियाणा सीमा पर लगाये जाने वाले पिलर-संवाद
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कैराना (शामली)। दो दिन पूर्व ही हरियाणा के पानीपत के रीशपुर व यूपी के मवी गांव के किसानों के बीच फायरिंग हुई। दशकों से सीमा विवाद को लेकर दोनों राज्यों के किसानों के बीच संघर्ष होते आ रहे हैं मगर दोनों राज्यों का प्रशासन सीमा विवाद को लेकर होने वाले संघर्षों पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहा है। शामली के जिलाधिकारी ने मामले में ब्योरा तलब किया है। जल्द ही पिलर लगवाकर समाधान कराने की बात कही है।
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यूपी के गांव मवी के किसानों का कहना है कि दीक्षित अवार्ड के अनुसार, यमुना नदी के दो किलोमीटर पीछे तक भूमि यूपी की सीमा में आती है, लेकिन उक्त भूमि पर हरियाणा के लोगों ने कब्जा कर रखा है। हरियाणा पुलिस व प्रशासन हरियाणा के लोगों का ही साथ देते हैं।

मवी निवासी सेठपाल ने बताया कि उनकी 140 बीघा जमीन यमुना के पार है। उनकी जमीन के पीछे सीमा के पिलर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जमीन पर हरियाणा के लोगों का अवैध कब्जा है।
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मवी निवासी रमेश ने बताया कि उसकी 26 बीघा जमीन यमुना के पार है। बैनामा रजिस्ट्री उसके नाम पर है, लेकिन भूमि पर हरियाणा के लोगों का कब्जा है। उच्चाधिकारियों को गुहार लगाने का भी कोई फायदा नहीं हुआ।

किसान इंदर ने बताया कि उसके चार भाइयों की 20 बीघा जमीन यमुना पार यमुना के नजदीक है। वह उस जमीन पर फसल बो रहे हैं। लेकिन हमेशा डर बना रहता है। सीमा पर पिलर लगाए जा रहे हैं।

किसान राकेश ने बताया कि उसकी 25 बीघा यमुना पार जमीन पर हरियाणा के लोगो ने कब्जा कर रखा है। उक्त भूमि दीक्षित अवॉर्ड के अनुसार यूपी प्रशासन की है, लेकिन हरियाणा के लोग कानून नहीं मानते।

- क्यों बना यूपी हरियाणा सीमा विवाद

हरियाणा-यूपी की सीमा को यमुना नदी अलग अलग करती थी, लेकिन यमुना की धारा बदलती रहने के कारण इधर की जमीन उधर और उधर की जमीन इधर आ जाती थी। जिसके चलते 1974 में केंद्र सरकार, हरियाणा व यूपी सरकार द्वारा दीक्षित अवॉर्ड का गठन किया गया था, जिसमें यमुना की मध्य धारा को दोनों प्रदेशों की सीमा मान कर पिलर लगाए गए थे। तय हुआ था कि यमुना पार गई भूमि का मालिक यूपी का किसान रहेगा और हरियाणा प्रशासन के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगा।
यूपी प्रशासन ने यमुना पार गई भूमि का राजस्व रिकाॅर्ड अपने यहां से डिलीट कर दिया, लेकिन हरियाणा प्रशासन ने उस रिकाॅर्ड को अपने राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं किया। जिस कारण यूपी के किसानों की जमीन लावारिस होकर रह गई तथा अवैध कब्जे हो गए। यूपी व हरियाणा के हाईकोर्ट में सैकड़ों मुकदमे भी चल रहे हैं और वहां से कई बार फैसले भी हुए। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी है।

- हरियाणा पुलिस तीन आरोपियों को ले गई अपने साथ

सोमवार को हरियाणा सीमा पर रीशपुर के पास फायरिंग के मामले में सोमवार रात करीब 10 बजे हरियाणा के थाना सनौली, समालखा व सीआईए फस्ट की चार गाड़ियों ने कोतवाली में आमद दर्ज कराने के बाद मवी में दबिश दी थी। इस दौरान हरियाणा पुलिस एक महिला सहित तीन आरोपियों को अपने साथ हरियाणा ले गई थी।

- सीमा विवाद से प्रभावित शामली और हरियाणा के गांव

हरियाणा सीमा से लगते यूपी के 16 गांव हैं जिनमें सीमा विवाद रहता है। इनमें सहपत, मामौर, नंगला राई, मवी, रामड़ा, मोहम्मदपुर राई, मंडावर, बसेड़ा अहतमाल, बसेड़ा गैर अहतमाल, पठेड़, बलहेड़ा, बिड़ौली, शीतल गढ़ी, मंगलौरा अहतमाल कदीम, नाई नंगला व भड़ी आदि शामिल हैं। इसके अलावा पानीपत के लालुपुरा, सदरपुर आदि कई गांव के लोग सीमा विवाद से ग्रस्त है।

- सीमा विवाद को लेकर हुए संघर्ष

वर्ष 2017 में हरियाणा के सनौली थाने के गांव रीशपुर के किसानों ने मवी के किसान की फसल, झोपड़ी, इंजन में आग लगाने के साथ ही किसानों को पीटा गया। कैराना कोतवाली पर रीशपुर के किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, क्योंकि घटनास्थल कैराना थाना क्षेत्र में आता था। लेकिन सीमा विवाद के चलते घटना स्थल को हरियाणा पुलिस ने अपना बताते हुए मवी के काफी किसानों पर मुकदमा दर्ज कर दिया था। सीमा विवाद के चलते दो प्रदेशों के थानों में मुकदमा दर्ज हुआ था। फसल कटने के दौरान कई बार बवाल हुआ।

दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर चले आ रहे विवाद प्रकरणों का ब्योरा तलब किया गया है। पिलर भी लगवाए जा रहे हैं। प्रयास रहेगा कि जल्द ही समस्या का समाधान करा दिया जाए। - अरविंद कुमार चौहान, जिलाधिकारी शामली
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