यूपी बोर्ड की मान्यता लेने के लिए स्कूल संचालकों को काफी मशक्कत करनी पडे़गी। इसके साथ ही अब आवेदन भी ऑनलाइन ही करने होंगे। बोर्ड ने मान्यता लेने में हो रहे फर्जीवाड़ा से बचने के लिए यह कदम उठाया है। बोर्ड ने हाल में ही नई अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार ही स्कूलों को नवीन मान्यता दी जाएगी।
जिला विद्यालय निरीक्षक एसएम सिद्दीकी ने बताया कि अब जनपद के सभी स्कूल संचालकों को यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की मान्यता लेने के लिए मशक्कत करनी पडे़गी। उन्होंने बताया कि अब मान्यता लेने के लिए सभी स्कूल संचालकों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के समय सभी मांगी जानकारियां एक दम सही भरनी होगी। उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड ने मान्यता के लिए नियमों में कुछ बदलाव किया गया है। जिसमें मान्यता लेने वाले स्कूलों में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की हाजिरी के लिए बायोमैट्रिक मशीन होने के साथ-साथ प्रत्येक कमरे में सीसीटीवी होना भी जरूरी है। ये व्यवस्था न होने पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया में सभी प्रमाण पत्र के साथ साथ सीसीटीवी और बायोमैट्रिक मशीन के फोटो भी स्कैन किए जाएंगे। इसके बाद आवदेन पत्र की हार्ड कॉपी और प्रमाण पत्रों की फोटो स्टेट लगाकर कार्यालय में जमा करनी होगी। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। जिसमें डीआईओएस और एसडीएम और एक राजकीय इंटर कॉलेज का प्रधानाचार्य होंगे। कमेटी की संस्तुति के बाद ही फाइल क्षेत्रीय सचिव कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि जनपद में नवीन मान्यता लेने वाले सभी स्कूल संचालक जिस वर्ष हाईस्कूल या इंटर की मान्यता लेना चाहते है वह उसके पूर्ववर्ती वर्ष 30 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। विलंब शुल्क के साथ 31 अक्तूबर तक आवेदन प्राप्त कर सकते है।
प्रक्रिया में बदलाव से क्या होगा फायदा
डीआईओएस ने बताया कि यूपी बोर्ड की मान्यता को लेकर किए गए बदलाव से काफी हद तक फर्जीवाड़ा दूर होगा। उन्होंने बताया कि पहले कुछ संस्थान एक ही बिल्डिंग में अलग अलग बोर्ड की मान्यता लेकर फर्जीवाड़ा करते थे। ऑनलाइन व्यवस्था होने से स्कूल एक बिल्डिंग में एक बोर्ड की मान्यता ले सकता है।
पूर्व में मान्यता लेने की प्रक्रिया
मान्यता लेने के लिए आवेदन पुस्तिका होती थी। जिसमें तीन कॉलम होते थे। पहला कॉलम स्कूल प्रबंधक का, दूसरा कॉलम जिला विद्यालय निरीक्षक के लिए और तीसरा कॉलम क्षेत्रीय सचिव के लिए होता था। जिसमें सभी नियमों के अनुसार लगाए गए प्रमाण पत्रों की डीआईओएस द्वारा मौके पर जांच करने के बाद पास कर क्षेत्रीय सचिव को फाइल भेजी जाती थी। जिसमें शहरी क्षेत्र के लिए 650 वर्ग मीटर भूमि और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2000 हजार वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य थी।