पूर्व अधिकारी भी कब्जाए बैठे सरकारी आवास
शामली। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटन पर सवाल उठाया है, तो शामली जिले में भी ऐसे सरकारी आवास हैं जिनको अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद भी खाली नहीं कर रहे हैं।
यूपी सरकार के उस कानून को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने निरस्त कर दिया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री को जिंदगीभर सरकारी आवास देने का नियम था। वहीं, ऐसा ही हाल शामली जिले में भी सामने आ रहा है। अवैधानिक रूप से पूर्व सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी इस सुविधा के पात्र बन बैठे है। उनमें शामली की पूर्व सीएमओ मंजीत कौर और स्टाफ नर्स दुर्गा भी शामली सीएचसी परिसर में सरकारी आवास में रह रही हैं। मंजीत कौर को सेवानिवृत्त हुए करीब एक साल होने वाला है, उनको ए क्लास का रूम सैट मिला था। इसके अलावा शामली सीएचसी पर तैनात रही स्टाफ नर्स दुर्गा भी सात माह पूर्व सेवानिवृत्त हो चुकी है, लेकिन अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया गया है। इस मामले में सीएचसी शामली द्वारा दोनों को आवास खाली करने के लिए पत्र भी लिखा जा चुका है। उधर, कैराना नगर पालिका में कार्यालय अधीक्षक रहे मुजफ्फर रज्मी को पालिका की तरफ से आवास मुहैया कराया गया था। सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी आवास को लेकर नगर पालिका से विवाद न्यायालय में चला। बाद में मुजफ्फर रज्मी का इंतकाल हो गया, लेकिन नगर पालिका का सरकारी आवास खाली नहीं हो पाया है।
वर्जन
डॉक्टर मंजीत कौर और स्टाफ नर्स दुर्गा को आवास खाली करने के लिए पूर्व में पत्राचार किया जा चुका है। सीएचसी प्रभारी को इस संबंध दोबारा से निर्देश दिया जाएगा, ताकि सरकारी आवासों को खाली कराया जा सके। - डाक्टर राजकुमार, सीएमओ