शामली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली कैबिनेट बैठक में लघु एवं सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ करने पर मुहर लगी, तो जिला स्तर पर भी इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई। बैंक और सहकारी समिति से जुड़े अधिकारी उन किसानों की गणना कराने में लगे हैं, जिनके पास एक लाख रुपये तक का
फसली ऋण था। वहीं, ऋण माफी संबंधी शासनादेश का अधिकारियों को इंतजार है।
जनपद शामली में करीब एक लाख पांच हजार किसान निवास करते हैं, जिनमें करीब 90 हजार लघु एवं सीमांत किसान बताए जाते हैं। इसके अलावा करीब 60 हजार किसान कृषि विभाग में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। वहीं, जिले में 29 सहकारी समितियां हैं, जिनसे 40 हजार किसानों ने ऋण लिया हुआ है। सहकारी समितियों से लिए गए ऋण की रकम करीब 120 करोड़ रुपये है।
इसके अलावा बैंकों से भी किसानों ने ऋण ले रखा है। अधिकारियों के मुताबिक जिले के लघु एवं सीमांत किसानों पर अनुमानित 500 करोड़ रुपये का ऋण है। इस संबंध में लीड बैंक मैनेजर हरपाल सिंह तोमर का कहना है कि जिले के समस्त किसानों पर करीब 1100 करोड़ रुपये ऋण है। लघु एवं सीमांत किसानों में एक लाख रुपये तक का ऋण लेने वाले किसानों का ब्यौरा अभी जुटाया जा रहा है।
सहायक निबंधक समिति के संजीव तिवारी का कहना है कि लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ करने संबंधी आदेश अभी शासन से प्राप्त नहीं हुआ है। शासनादेश आने के बाद तय किया जाएगा कि कितने किसानों को इसका लाभ मिलेगा। जिले भर के किसानों की सूची बनाई जाएगी, जो शासनादेश के आधार पर पात्र होगा, उसी किसान का ऋण माफ किया जाएगा।
भारतीय किसान मंच के उपाध्यक्ष सुनील पंवार का कहना है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने किसानों की भावना के साथ खिलवाड़ किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी किसानों का ऋण माफ करने की बात कही थी, लेकिन कैबिनेट की पहली बैठक में लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ करने पर मुहर लगाई गई।
बतीसा खाप के बाबा सूरजमल का कहना है कि सभी किसानों का ऋण माफ होना चाहिए था, किसी तरह की शर्त नहीं लगानी चाहिए। इसके साथ ही किसानों की सबसे बड़ी समस्या बिजली बिल और खाद की बढ़ती कीमतें हैं। यदि प्रदेश सरकार किसानों की इतनी हितैषी है, तो बिजली बिल माफ किए जाएं और खाद की कीमतों को कम कराया जाए।
कर्ज के बोझ में जान गंवा चुका एलम का किसान
कांधला/शामली। बैंक से लिया ऋण अदा नहीं होने और तंगहाली में खुदकुशी के मामले से जनपद भी अछूता नहीं रहा है। कांधला क्षेत्र के गांव एलम निवासी किसान ने महज सवा लाख रुपये का ऋण अदा नहीं कर पाने के कारण खुदकुशी कर ली थी। उक्त परिवार को प्रशासन ने आर्थिक मदद का आश्वासन भी दिया था, लेकिन मुआवजा मिला आज तक नहीं।
नगर पंचायत एलम निवासी अनंगपाल ने 29 अप्रैल 2015 को ट्यूबवेल पर पहुंचकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अनंगपाल के बेटे नितेश पंवार ने बताया कि उनके पिता ने एलम स्थित पीएनबी शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड पर सवा लाख रुपये ऋण लिया था। फसल उत्पादन ठीक नहीं होने के कारण ऋण जमा नहीं हो पाया था और विद्युत बिल भी 30 हजार रुपये बकाया हो गया था। बैंक की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया था, तो विद्युत विभाग ने उनका विद्युत कनेक्शन काट दया था। इसी कारण उनके पिता अनंगपाल अवसाद में आ गए थे और अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी।