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नगरपालिका ईओ पर 48 हजार का अर्थदंड

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शामली। कम प्रेशर और दूषित पेयजल आपूर्ति मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नगर पालिका ईओ पर 48 हजार का अर्थदंड लगाया है। आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार और महिला सदस्य अमरजीत कौर ने अपने आदेश में कहा कि इसमें 25 हजार रुपये दूषित पेयजल आपूर्ति पर, 20 हजार रुपये अनुचित व्यवहार और तीन हजार रुपये वाद व्यय के होंगे। यह धनराशि 30 दिन में आयोग के खाते में जमा नहीं करने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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रेलपार मोहल्ला शिव विहार निवासी बबीता पत्नी योगेंद्र ने वर्ष 2016 में परिवाद दायर किया था। जिसमें आरोप लगाया था कि टंकी का प्रेशर कम होने से पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऊपर की मंजिल पर पानी नहीं चढ़ पाता है। पानी भी दूषित और दुर्गंधयुक्त आता है, जो कुछ समय रखने पर पीला पड़ जाता है। दूषित पानी पीने से उनके परिवार के सदस्य व मोहल्ले के लोग बीमार पड़ चुके हैं। इस बारे में नगर पालिका में शिकायत की, लेकिन नगर पालिका ने व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया। इस बार में नोटिस भेजने के बाद नगर पालिका की ओर से उन्हें 76,446 रुपये का गृहकर व जलकर के बिल में नोटिस भेज दिया।
नगर पालिका ने यह जवाब किया दाखिल
- नगर पालिका की ओर से जवाब दाखिल किया गया कि बबीता ने कभी दूषित पानी और कम प्रेशर की शिकायत नहीं की। किसी सदस्य की बीमार होने की मेडिकल रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की। वह टैक्स नहीं देना चाहती हैं। उनके नोटिस पर नगर पालिका कर्मचारी को भेजकर समस्या का निस्तारण करा दिया गया था।
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घर के ऊपरी मंजिल में उपभोक्ता फोरम न्यायालय
नगरपालिका ने अपने जवाब में यह भी कहा कि बबीता के मकान के ऊपरी हिस्से का उपयोग जिला उपभोक्ता फोरम न्यायालय के रूप में हो रहा है, जो व्यवसायिक है। व्यवसायिक आधार पर पूरे मकान का कर निर्धारण किया गया। शहर में जलापूर्ति के संबंध में कोई स्थायी समस्या नहीं आती है। छोटी-मोटी समस्याओं का निस्तारण कर्मचारी भेजकर कर दिया जाता है। आयोग को इस मामले में संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है।
पूरे मकान को मान लिया व्यवसायिक
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि नगर पालिका का विधिक दायित्व है कि वह नागरिकों को स्वच्छ पेयजल, सड़क व स्ट्रीट लाइट उपलब्ध कराए। परिवादी का मकान का ऊपरी हिस्सा ही व्यवसायिक उपयोग में है और पूरे मकान को व्यवसायिक मानते हुए गृहकर व जलकर का निर्धारण किया गया है। इसमें अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाया गया है।
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