फिर हसन परिवार होगा आमने-सामने
शामली। कैराना लोकसभा सीट पर एक बार फिर हसन परिवार आमने-सामने होगा। एक तरफ गठबंधन से तबस्सुम हसन प्रत्याशी हैं, तो उनके देवर कंवर हसन ने भी चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र खरीद लिया है। पूर्व के कई चुनाव में भी हसन परिवार में बिखराव सामने आता रहा है। इस बार के उपचुनाव में भी वही स्थिति बन गई है।
बुधवार को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर कंवर हसन के नाम से नामांकन पत्र खरीदा गया। इससे साफ है कि अब कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में कंवर हसन भी अपनी भाभी तबस्सुम हसन के सामने चुनाव लड़ेंगे। कैराना की राजनीति में हसन और हुकुम परिवार का दबदबा रहा है। हसन परिवार से मुनव्वर हसन राजनीतिक बागडोर संभालते रहे, लेकिन 10 दिसंबर 2008 में सड़क हादसे में मुनव्वर हसन का इंतकाल हो गया था। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में उनकी पत्नी तबस्सुम हसन बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर कैराना की सांसद चुनी गई थीं, लेकिन उसके बाद परिवार में बिखराव पैदा हो गया था। इसी के चलते 2012 में मुनव्वर हसन के भाई हाजी अनवर हसन ने कैराना विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में हसन परिवार चुनावी मैदान में आमने सामने आ गया था। तब सपा के टिकट पर नाहिद हसन चुनाव लड़े, तो बसपा के टिकट पर मुनव्वर हसन के दूसरे भाई कंवर हसन चुनाव लड़े। उस चुनाव में सपा प्रत्याशी नाहिद हसन को 3,29,081 वोट मिले थे, जबकि कंवर हसन को 1,60,414 वोट प्राप्त हुए थे। वहीं, 2014 में ही सांसद हुकुम सिंह ने कैराना से विधायक पद से इस्तीफा दिया, तो कैराना विधानसभा सीट के उपचुनाव में सपा से नाहिद हसन चुनाव लड़े थे, तो उनके चाचा अरशद हसन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। उसमें जीत नाहिद हसन को मिली थी। हालांकि जनवरी 2016 में जब जिला पंचायत का चुनाव हुआ, तो हसन परिवार में फिर से एकता कायम हो गई थी। उस चुनाव में तबस्सुम हसन और उनकी बेटी इकरा हसन ने चुनाव लड़ा था। इकरा हसन के चुनाव के लिए अनवर हसन और कंवर हसन भी प्रचार किया था। उधर, बीते दिनों हुए नगर निकाय चुनाव में फिर से हसन परिवार का बिखराव सामने आया। उस चुनाव में कैराना नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए हाजी अनवर हसन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े, तो विधायक नाहिद हसन ने सपा प्रत्याशी राशिद अली को चुनाव लड़ाया, लेकिन जीत हाजी अनवर हसन को मिली। अब देखना यह है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में देवर - भाभी के चुनाव मैदान में सामने आने पर क्या स्थिति रहती है।