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संसाधनों के अभाव में कैसे करें मलेरिया से मुकाबला

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संसाधनों के अभाव में कैसे करें मलेरिया से मुकाबला
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शामली।
बुखार आने पर मलेरिया और टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से यह बीमारियां फैलती हैं, लेकिन शहर के साथ ही ग्रामीण अंचल में मच्छरों का प्रकोप कम करने के लिए दवा का छिड़काव तक नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि मलेरिया विभाग खुद ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि कम स्टाफ और संसाधनों के अभाव में आखिर मलेरिया से विभाग कैसे लड़ेगा।
शामली जनपद के कैराना, कांधला और ऊन क्षेत्र में बुखार के मरीज लगातार अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इसकी बड़ी वजह गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप है। जिला प्रशासन के पास भी ऐसी शिकायतें पहुंचती हैं कि गंदगी और जलभराव की वजह से मच्छरों का प्रकोप हो रहा है, जिस कारण बीमारियां फैल रही हैं। खासकर शहरी इलाकों में मलिन बस्तियों में गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप ज्यादा फैल रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डाक्टर विनय कुमार का कहना है कि मलेरिया की रोकथाम के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी लारवा दवा उपलब्ध है। क्लोरीन की टेबलेट भी पर्याप्त हैं, जिनका वितरण कराया जाता है।
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विभाग की स्थिति
मलेरिया विभाग में स्टाफ की काफी कमी है। वर्तमान में एक जिला मलेरिया अधिकारी, एक मलेरिया इंस्पेक्टर तैनात हैं, जबकि प्रयोगशाला सहायक के 15 पदों के सापेक्ष छह, लैब टेक्नीशियन के सात पदों के सापेक्ष पांच, हेल्थ सुपरवाइजर के 22 पदों के सापेक्ष 10 ही तैनात हैं। इसके अलावा पुरुष स्वास्थ्य कर्मी और महिला स्वास्थ्य कर्मी कोई नहीं है। सहायक मलेरिया अधिकारी नहीं है। शामली सीएचसी पर एक भी हेल्थ सुपरवाइजर नहीं है। कार्यालय में लिपिक तक नहीं है।
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दवा का छिड़काव कराया और क्लोरीन की गोलियां बांटी
शामली। जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर विनय कुमार ने बताया कि बुधवार को मलेरिया दिवस पर गांव खेड़ा कुर्तान और गंगेरू में पहुंचकर लोगों को जागरूक किया गया। गंगेरू में ग्रामीणों से वार्ता कर बीमारियों के बारे में जाना, लेकिन बुखार पीड़ित कोई मरीज नहीं मिला। इसके बाद गांव प्रधान की मौजूदगी में एंटी लारवा की दवा का छिड़काव कराया गया और क्लोरीन की पांच हजार टेबलेट भी वितरित की गईं। इसी तरह गांव खेड़ा कुर्तान में भी दवा का छिड़काव कराकर टेबलेट वितरित की गई।
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