परिषदीय स्कूलों में बच्चों को नहीं मिल रहा दूध
शामली।
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कैराना क्षेत्र के परिषदीय स्कूल और मान्यता प्राप्त स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में उन्हें परिषदीय स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं मिलने और बच्चों की संख्या कम होने की शिकायत मिली। वहीं, मान्यता प्राप्त स्कूलों में मान्यता से अधिक कक्षाएं चलती पाई गई। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा। वहीं, अमान्य स्कूलों को बंद कराया और संचालकों को नोटिस दिया।
बुधवार को बीएसए चंद्रशेखर ने टीम के साथ कैैराना क्षेत्र के गांव सहपत और गांव तितरवाड़ा के परिषदीय स्कूल और अमान्य स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में वह सबसे पहले गांव सहपत के उच्च प्राथमिक स्कूल में पहुंचे। स्कूल में 40 पंजीकृत बच्चों में से 22 उपस्थित मिले। इंचार्ज अध्यापिका द्वारा बच्चों को दूध पीने के लिए नहीं देने और कम छात्र संख्या के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। वहीं, प्राथमिक विद्यालय में सभी व्यवस्था ठीक मिली। गांव के ही साइनिंग पब्लिक स्कूल का निरीक्षण किया, जिसकी मान्यता कक्षा एक से 5 तक थी और कक्षा एक से 8 तक चलती मिली। स्कूल भी घर में चलता मिला। अमान्य कक्षाएं मौके पर बंद कराई। स्कूल प्रबंधक सुंदर को नोटिस दिया। भविष्य में कक्षा चलती पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, तितरवाड़ा के गांव स्थित एसडी पब्लिक स्कूल में भी मान्यता पांच तक और कक्षाएं आठ तक चलती मिली। बीएसए ने मौके पर ही कक्षा बंद कराते हुए प्रबंधक को नोटिस देते हुए तीनों कक्षाओं के बच्चों को पास के परिषदीय स्कूल या फिर मान्यता प्राप्त स्कूल में दाखिला कराने के निर्देश दिए। वहीं, गोचर पब्लिक स्कूल कक्षा आठ तक मान्यता प्राप्त है, जिसमें अप्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य होते हुए पाया गया। स्कूल में साफ सफाई नहीं मिली। प्रबंधक को नोटिस दिया। संत प्रेमनाथ पब्लिक स्कूल का संचालन नियत स्थान पर न होकर ग्राम पंचायत की चौपाल में होता मिला। स्कूल में 200 बच्चे पंजीकृत मिले। अप्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य कराया जा रहा था, जिसके चलते बीएसए चंद्रशेखर ने प्रबंधक नाथीराम को नोटिस दिया गया।
जनपद में चल रहे हैं एक सौ से अधिक अमान्य स्कूल
जनपद के पांचों ब्लाक में लगभग एक सौ से अधिक अमान्य स्कूल संचालित है। सबसे ज्यादा स्कूल 51 स्कूल ऊन ब्लाक में संचालित है, जिसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे स्कूलों के खिलाफ कोई विशेष अभियान नहीं चलाते। जब भी तहसील दिवस या फिर मुख्यमंत्री से कोई किसी स्कूल की शिकायत करता है तब जाकर ही शिक्षा विभाग के अधिकारी केवल उन्हीं स्कूलों का निरीक्षण करते हुए खानापूर्ति कर देते हैं। ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों का भविष्य कगार पर है।