आंदोलनकारी शिक्षामित्रों ने सोमवार को प्रदर्शन कर बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर तालाबंदी कर दी। धरना-प्रदर्शन में पहुंचकर बसपा और कांग्रेस नेताओं ने भी शिक्षामित्रों के आंदोलन को समर्थन दिया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षामित्रों की शालीनता को कमजोरी न समझें और इनका हक दिलाया जाए।
समायोजन को लेकर शिक्षामित्र आंदोलनरत हैं। बनत स्थित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर सोमवार को छठे दिन भी शिक्षामित्रों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस ने कहा कि प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों के हितों के बारे में सोचना चाहिए, जिस तरह त्रिपुरा में दस हजार से ज्यादा शिक्षकों का समायोजन किया गया था, वैसे ही कैबिनेट में विधेयक पास करके शिक्षामित्रों को लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों की शालीनता को प्रदेश सरकार कमजोरी ना समझे।
कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक पंकज मलिक ने कहा कि प्रदेश सरकार की नीयत में खोट है, तभी तो शिक्षामित्रों के इतने दिन आंदोलन चलने के बावजूद सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षामित्रों के परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार को इनके बारे में सोचना चाहिए।
शिक्षामित्र संगठन के प्रदेश प्रवक्ता नाजिम राणा तथा जिलाध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने कहा कि अपने हकों की लड़ाई के लिए किसी भी प्रकार के आंदोलन से पीछे नहीं रहेंगे। जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन चलता रहेगा। इसके बाद शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर तालाबंदी कर दी। तालाबंदी करने के बाद भी धरना प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान चैनपाल चौधरी, चंद्रभान सिंह, आदेश चौधरी, अमित चौधरी, बसपा नेता अरविंद गौतम, पूजा रानी, दर्शन देवी, सारिका, परवीन, सीताराम, सपना, प्रीति, उपकार चौधरी, इस्लामुद्दीन, सोनी, अमित और नाथीराम आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।