शामली। आर्य समाज हिंगोखेड़ी (कंडेला) की ओर से आयोजित संस्कार सम्मेलन में वेद मंत्रों से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर वैदिक संस्कृति के मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन की उन्नति को सद्गुणों को धारण करें। बुराइयों के त्याग से ही जीवन सफल होता है।
रविवार को हिंगोखेड़ी में आयोजित सम्मेलन में वैदिक संस्कृति की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वेद पुरोहित सुदेश पाल आर्य को शाल और सम्मान राशि भेंट कर आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मानित किया। मुजफ्फरनगर से पधारे वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आर्य ने कहा कि संस्कार संस्कृति के जनक है। बच्चों के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को सुसंस्कृत बनाना संस्कार हैं। माता-पिता की सेवा करना, आज्ञा का पालन करना, सदाचार और देशभक्ति जैसे गुणों से युक्त जीवन बनाये। समाज सुधार के लिए महर्षि दयानंद के कार्यों और सिद्धांतों की गांव-गांव में अलख जगानी होगी। वेद सब सत्य विधाओं के ग्रन्थ है। युवा पीढ़ी राष्ट्र विरोधी ताकतों के खिलाफ आवाज उठाये। शहीदों, महापुरुषों के जीवन चरित्र को पढ़े। देशभक्ति से बड़ा कोई धर्म नही है। वेद प्रचारक सुदेश पाल आर्य ने कहा कि परिवारों में यज्ञ होंगे, तभी संतान संस्कारित बनेगी। आयुर्वेदिक औषधियों से बनी सामग्री, पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा करती है। प्रधान कर्ता राम और मांगेराम ने अतिथियों का स्वागत किया। सोहराब सिंह आर्य, अमित आर्य, अरविंद आर्य, इसम सिंह आदि मौजूद रहे। यज्ञमान प्रवीण कुमार रहे।