कैराना/चौसाना (शामली)। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 55 सेमी ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर में बढ़ोतरी होने ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। रविवार रात आठ बजे तक यमुना का पानी 231.40 मीटर पहुंच गया था। वहीं, चौसाना क्षेत्र के गाव साल्हापुर में ड्रेनेज खंड द्वारा तैैयार की गई ठोकर तेज बहाव में बह गई हैं। उधर, यमुना ब्रिज पर जलस्तर की उठापटक के चलते पानी हजारों बीघा फसलों को बर्बाद करते हुए यमुना बांध तक पहुंच गया। वहीं, प्रशासन भी हाई अलर्ट के बाद मुस्तैद हो गया है।
पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक वर्षा के चलते हथिनीकुंड बैराज पर पानी का दबाव बनने के कारण यमुना नदी में पानी निरंतर छोड़ा जा रहा है। बृहस्पतिवार को यमुना में 1,87,272 क्यूसेक, शुक्रवार को 1,27,417 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शनिवार को शाम सात बजे 5.63 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। हथिनी कुंड बैराज से यमुना नदी में शनिवार को छोड़ गए पानी का जिले में असर दिखाना शुरू हो गया है। यमुना का खतरे के निशान 230.85 मीटर पर दर्ज है। रविवार रात आठ बजे यमुना का जल स्तर 231.40 मीटर पर पहुंच गया है। मौजूदा समय यमुना खतरे के निशान से 55 सेमी ऊपर है।
दूसरी ओर, एक दिन पहले यमुना में छोड़े गए पांच लाख से अधिक क्यूसेक पानी ने क्षेत्र के ग्राम रामड़ा, नंगलाराई, मोहम्मदपुर राई, इस्सोपुर खुरगान, मामौर, मवी, हैदरपुर, सहपत आदि विभिन्न गांवों में किसानों की हजारों बीघा फसल को तबाह कर दिया। यमुना के पानी से किसानों की फसलें पूरी तरह से जलमग्न होने के कारण बर्बाद हो चुकी है। यमुना किनारे स्थित शिव मंदिर के पीछे भी पानी भरा हुआ है। यहां स्थित ड्रेनेज विभाग के कार्यालय के बाहर भी जलभराव हो रहा है। वहीं, यमुना नदी का दायरा भी पानी के कारण बढ़ गया, जिससे तटबंध के अंदर खेती करने वाले बहुत से किसानों की हजारों बीघा फसल यमुना के पानी में समां गई। नंगलाराई व मोहम्मदपुर राई के बीच में किसानों ने पानी आने के अंदेशे में खेतों में खड़ी धान की कच्ची फसल ही काट दी और ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर अपने घर ले गए।
बारिश से तटबंध में कटान, सोया ड्रेनेज विभाग
यमुना नदी का पानी फिलहाल कहीं-कहीं पर कम मात्रा में तटबंध तक पहुंच गया है। पिछले चार दिनों में हुई बारिश ने ड्रेनेज विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। कैराना यमुना नदी से लेकर बिड़ौली तक तटबंध में 100 से अधिक जगह कटान मिल जाएगा। बांध में 4 और 6 से 7 फुट तक गहरा कटान हो रहा है। हैरत की बात तो यह है कि 2013 में जिस मोहम्मदपुर राई में तटबंध टूट गया था, उसकी मरम्मत ढंग से नहीं होने के कारण वह अब बारिश में ही टूटता जा रहा है। यदि 2013 की तरह यमुना में पानी बढ़ जाता है, तो तटबंध टूटने से कोई रोक नहीं पाएगा।
मोटरबॉट और पीएसी के जवान तैनात
यमुना के उफान पर होने तथा कांवड़ यात्रा शुरू होने के चलते नदी किनारे मेरठ से पीएसी 44 वी बटालियन के 16 गोताखोरों की तैनाती की गई है। पीएसी गोताखोरों की टीम के पास मोटरबोट भी है। पीएसी के हेडकांस्टेबल बाबूराम त्यागी ने बताया कि उनके टीम के जवान 24 घंटे यमुना पर नजर रख रहे है।
नपा ने नदी किनारे चलाया सफाई अभियान
रविवार को नगर पालिका परिषद कैराना के खाद्य एवं सफाई निरीक्षक अनिल कुमार की अगुवाई में 12 सदस्यीय पालिकार्मियों की टीम यमुना नदी किनारे पहुंची, जहां पर उन्होंने फावड़ों से सफाई अभियान चलाया और वहां पर सफाई करने के उपरांत घांस-फूंस एवं कूड़े को हटवा दिया। बरसात में नदी किनारे घांस-फूंस उगा होने के कारण जहरीले जानवरों के काटने की आशंका रहती है। अभियान के दौरान सफाई नायक सुभाष चंद, मोहम्मद असलम, पीरजी अबसार आदि पालिकाकर्मी भी मौजूद रहे।
एसडीएम ने ब्रिज और तटबंध का लिया जायजा
एसडीएम सुरजीत कुमार ने कांवड़ यात्रा के सकुशल संपन्न कराने हेतु रविवार को यमुना पर पहुंचकर यूपी-हरियाणा बॉर्डर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नदी किनारे तटबंधों का भी जायजा लिया तथा वहां पर कांवड़ियों के स्नान के लिए देखा कि यमुना पर बल्लियों की व्यवस्था कराई गई है या नहीं। नदी में कुछ ही बल्लियां लगी हुई मिलीं। इस दौरान उन्होंने और बल्लियां लगवाये जाने के निर्देश दिए। साथ ही, गोताखोरों से कहा कि वह हर समय मुस्तैद रहें। उन्होंने साफ-सफाई के भी निर्देश दिए हैं।
भड़ी और साल्हापुर में यमुना का पानी खेतों में घुसा
चौसाना। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण भड़ी और साल्हापुर में कई बीघा गन्ने की फसल नष्ट हो गई। यमुना नदी का पानी तटबंधों को तोड़कर खेतों में घूस गया। साल्हापुर में निर्माणाधीन तटबंध भी बह गए। ग्रामीणों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। चौसाना के गांव लक्ष्मीपुरा, भड़ी, मुस्तफाबाद, भरतपूरी, सुंदरनगर, ऊदपुर, सकौती, मंगलौरा, नाईनंगला, साल्हापुर यमुना नदी के किनारे पर बसा हुआ है। जलस्तर बढ़ने के कारण सभी गांवों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। साल्हापुर व भड़ी में गन्ने की फसल को काफी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि साल्हापुर में तटबंध संख्या 06 से 9 के बीच तटबंधों का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन जलस्तर के बढ़ने के कारण दो महीनों से बनाई जा रही सभी तटबंध पानी के तेज बहाव में बह गई। जिसके बाद तटबंध के निर्माण में लगे मजदूर वहां से चले गए। देर रात से लगातार पानी का जलस्तर बढ़ रहा है और ग्रामीण आशंका में जी रहे है। ड्रेनेज विभाग के जेई अशोक कुमार का कहना है कि शामली के सभी गांव खतरे से बाहर है।