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स्वाइन फ्लू तो क्या? टाईफाइड़ जांच किट तक नहीं

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शामली।
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जिले में स्वाइन फ्लू से पीड़ित व्यक्ति की मौत हो चुकी है। संक्रामक बीमारियों ने पांव पसार लिया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के पास इन बीमारियों से निपटने के लिए संसाधनों का अभाव है। जिले में हालत इतनी खराब है कि स्वाइन फ्लू की किट तक नहीं है। मजबूरन लोगों को जांच के लिए प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
अभी हाल ही में थानाभवन क्षेत्र के गांव हींड में दिलशाद नाम के व्यक्ति की स्वाइन फ्लू के कारण अपोलो अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हुई है। इसके अलावा लगातार बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के नाम दंभ भरने वाली सरकार अरबों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है। छह महीने तक जिले के अस्पताल में पैरासिटेमाल टेबलेट तक नहीं है। स्वाइन फ्लू की बात करें तो जिले में इसका न तो उपचार संभव है और न ही इसकी जांच। मेरठ के डाक्टरों ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को संदिग्ध मरीजों को मेरठ ही बुलवाया है।
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स्वाइन फ्लू वार्ड तक नहीं
स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड आरक्षित किया जाता है। इससे संक्रमित मरीज को इसकी वार्ड में रखा जाता है, ताकि संक्रमण न फैले। इसके अलावा स्वाइन फ्लू का उपचार करने वाले तथा उसके कल्चर का सेंपल लेने वाली टीम के लोगों के पास स्पेशल मास्क होता है, जिसे एन 95 कहा जाता है, लेकिन शामली जिले में महज एक ही मास्क है और न ही अभी तक वार्ड आरक्षित किया गया है। उधर, स्वाइन फ्लू से संक्रमित लोगों के लिए टेमी फ्लू नामक कैप्सूल दिया जाता है और इसी का कोर्स चलाया जाता है। पूरे जिले में 100 कैप्सूल थे, जिनमें से मात्र 40 कैप्सूल बचे हुए हैं। ऐसे में मरीज यदि सामने आ जाते है तो उनको यह कैप्सूल पर्याप्त नहीं है।
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वार्ड आरक्षित कराया जा रहा है, मास्क तथा टैमी कैप्सूल की व्यवस्था कराई जा रही है, टायफाइड किट भी जिले में आ गई है, जिनको संबंधित अस्पतालों का वितरित किया जा रहा है
-डा. सफल कुमार
प्रभारी सीएमओ
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