राझड़ के ओशो बने लेफ्टिनेंट, परिजनों में खुशी का माहौल
अमर उजाला ब्यूरो
गढ़ीपुख्ता। क्षेत्र के गांव राझड़ निवासी ओशो वर्मा ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर गांव का नाम देश में रोशन किया है। होनहार ओशो ने भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से पास आउट कर यह मुकाम हासिल किया है। ओशो की सफलता पर परिजनों में खुशी का माहौल है। ग्रामीण उनके आवास पर पहुंचकर परिजनों को बधाई दी।
गांव राझड़ निवासी चौधरी राममेहर सिंह के बेटे ओशो वर्मा ने देश के सर्वश्रेष्ठ सैन्य प्रशिक्षण संस्थान आईएमए देहरादून से पासआउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। ओशो का पूरा परिवार भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में गर्व के इन लम्हों का साक्षी बना। ओशो के पिता राममेहर सिंह, मां सरिता देवी, बुआ राकेश, मामी संगीता इस समारोह में शामिल हुए। ओशो की सफलता पर परिजनों में जश्न का माहौल है। परिजनों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। परिजनों ने बताया कि ओशो की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा पांच तक गांव में हुई। इसके बाद सैनिक स्कूल कुंजपुरा करनाल में कक्षा 12 तक ,उसके बाद एनडीए पुणे में तीन साल की ट्रेनिंग हुई। ओशो के पिता राममेहर सिंह व अन्य परिजनों का कहना है कि ओशो की इस सफलता के बाद जय जवान जय किसान का हमारे परिवार का नारा पूरा हो गया है। ओशो वर्मा सेना में ऑफिसर बनने वाले परिवार के पहले बेटे हैं ।
बचपन से देश सेवा करने का था जज्बा
लेफ्टिनेंट बने ओशो ने बताया कि उन्हें बचपन से ही देश सेवा करने का सपना था। वह देश के लिए कुछ करना चाहता था। इसके लिए उसने सेना में जाने की तैयारी की थी। उनका कहना है कि सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का इससे अच्छा कोई मौका नहीं हो सकता। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व परिजनों को दिया है। ओशो का छोटा भाई 15 वर्षीय रजनीश कस्बा गढ़ीपुख्ता के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ रहा है। ओशो के पिता प्रगतिशील किसान है और मां गृहिणी है।