व्यापारियों को नहीं भाया सरकार का बजट
शामली। केंद्र सरकार के आम बजट से व्यापारी वर्ग में निराशा है। न तो इनकम टैक्स में छूट बढ़ी और न ही व्यापारियों के लिए कोई नई घोषणा की गई। व्यापारियों ने कहा कि किसान और गरीबों के लिए तो आम बजट अच्छा है, लेकिन व्यापारी वर्ग का कतई ख्याल नहीं रखा गया। वहीं, विपक्षी राजनीतिक दलों का भी कहना है कि केंद्र सरकार ने आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बजट बनाया है, जिससे देश की जनता को कोई फायदा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
व्यापारियों और नेताओं की प्रतिक्रिया
-- इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन चैप्टर शामली के चेयरमैन वेदप्रकाश आर्य का कहना है कि आम बजट में केंद्र सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्योग के लिए कोई खास घोषणा नहीं की। कृषि उपभोग वाले उपकरण बनाने वालों को कोई लाभ नहीं मिला। इनकम टैक्स में छूट नहीं बढ़ाई गई, लेकिन बड़ी कंपनियों को ही लाभ दिया गया है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों को नजरअंदाज किया गया है। केवल गरीब और किसानों के हित में बजट बनाया गया है।
-- पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग का कहना है कि आम बजट व्यापारियों के लिए अच्छा नहीं है। उम्मीद थी तीन लाख रुपये तक की छूट इनकम टैक्स में मिलेगी। बजट संतुलित है, जो किसान और गरीबों के लिए तो अच्छा है, मगर इससे व्यापारी वर्ग को कोई फायदा नहीं होगा। व्यापारी ईमानदारी से टैक्स जमा करता आया है, लेकिन सरकार ने व्यापारी का हित नहीं सोचा।
-- कांग्रेस के पूर्व विधायक पंकज मलिक का कहना है कि नाम आम बजट है, लेकिन जनता को ध्यान में रखकर बजट नहीं बना। नौजवान हर बजट को सोचता है, ऐसी योजना आएगी जिससे नए रोजगार मिलेंगे। महंगाई पर अंकुश नहीं है। जो पिछली सरकार की अपेक्षा में महंगाई बढ़ गई। किसान भी उम्मीद से सरकार की तरफ देख रहा था, किसान के हाथ कुछ नहीं लगा। जो बदलाव थोड़े बहुत किए हैं, वह जरूरत के हिसाब से बहुत कम है। इस बजट को देखकर लगता है चुनाव को देखकर जल्दबाजी में बजट तैयार किया गया है।
-- पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस का कहना है कि जन उपयोगी शिक्षा-स्वास्थ्य पर सेस बढ़ाने का निर्णय जनविरोधी है। आयकर छूट में कोई बदलाव नहीं, आयकर में छूट की सीमा पांच लाख तक करनी चाहिए थी। बजट में हर तरह से मध्यम वर्गीय पर मार है। कस्टम ड्यूटी बढ़ने से मोबाइल, टीवी और महंगा हो जाएगा। हमेशा से गरीब के जीवन की एक बड़ी चिंता रही है बीमारी का इलाज। बजट में प्रस्तुत की गई नई योजना ‘आयुष्मान भारत’ सराहनीय है। किसान प्रधान देश में किसानों को ब्याज मुक्त ऋण, समय से ऋण अदायगी पर सब्सिडी। केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा एमएसपी लागू करने के लिय किसान फसल मूल्य गारंटी अधिनियम बनाना चाहिए।
-- उत्तर प्रदेश योजना आयोग के पूर्व सदस्य एवं सपा नेता प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि वित्त मंत्री ने सभी वर्गों को संतुष्ट करने की कोशिश की है, लेकिन दिया किसी को कुछ नहीं। यह कोरा चुनावी बजट है, जो आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए लाया गया है। महज कुछ उपायों की घोषणा की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, मुफ्त बिजली कनेक्शन पर बजट दिया गया है, जो मध्यम वर्ग के हाथ निराशा लगी है। क्योंकि न तो टैक्स छूट का प्राविधान है और न ही उपयोगी वस्तुओं के टैक्स में छूट दी गई है। किसानों को भी आंकड़ों के जाल में फंसाया गया है। उससे किसानों को कोई लाभ होता नहीं दिखाई दे रहा है।
-- उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित गोयल का कहना है कि छोटे व्यापारी उम्मीद जता रहे थे कि इनकम टैक्स की सीमा कम से कम तीन लाख होगी, लेकिन आम बजट से व्यापारियों को निराशा हाथ लगी। केंद्र सरकार को व्यापारियों का हित भी सोचना चाहिए था।
-- पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के नगराध्यक्ष नरेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि आम बजट में ज्यादातर बातें किसानों के लिए कही गई हैं, व्यापारियों के लिए कुछ खास नहीं आया। नौकरीपेशा के लिए ही छूट दी गई है, जबकि जीएसटी और नोटबंदी के बाद व्यापारी को भी सहूलियत मिलनी चाहिए थी। किसान और देश के विकास के लिहाज से बजट अच्छा है।