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जाटो ने मांगा आरक्षण कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा

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जाटों ने मांगा आरक्षण
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शामली। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर देेशभर के जाटों को केंद्र और प्रदेश स्तर पर ओबीसी में शामिल करने की मांग की गई। इस संबंध में कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा हैं।
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बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष सतेंद्र चिकारा के नेतृत्व में कार्यकर्त्ताओं ने कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन डीएम इंद्र विक्रम सिंह को सौंपकर अवगत कराया कि देशभर में वर्ष 1993 से जाट समाज लगातार सभी प्रदेशों व केंद्र की ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग की जाती रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी ने जाट समाज से किए वादे के मुताबिक राजस्थान के जाटों को भरतपुर-धौलपुर जिलों को छोड़कर वर्ष 1999 में आरक्षण दे दिया गया था। आठ राज्यों की तत्कालीन सरकारों द्वारा उन प्रदेशों में बनाए गए विभिन्न कमीशन राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्यप्रदेश,राजस्थान, बिहार, गुजरात, का वर्ष 2001 तक आरक्षण मिल चुका था। इसी के साथ प्रदेश के तत्कालीन भाजपा के मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता द्वारा भी वर्ष 2000 में जाटों को राज्य की पिछड़ा वर्ग श्रेेणी में शामिल कर लिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने तुरंत आयोग का गठन करके जाट समाज को केंद्रीय स्तर पर अन्य पिछड़े वर्ग की श्रेणी में शामिल करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में समिति के अध्यक्ष सतेंद्र चिकारा, मोनू चिकारा, तीरतपाल, ओमवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, सुनील कुमार दलाल, सुनील कुमार, विकास कुमार, मुन्ना सिंह, इंद्रपाल सिंह, अनुज कुमार, रोहित चौधरी, सचिन, रवि सिरोही आदि मौजूद रहे।
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